वर्तमान समय की मांग एवं जीने का सही तरीका मर्यादित जीवन।*

धर्म

*वर्तमान समय की मांग एवं जीने का सही तरीका मर्यादित जीवन।*
संसार में प्रत्येक वस्तु, जीव नदी, वायु एवं प्रकृति आदि सभी की अपनी अपनी मर्यादा होती है प्रत्येक जीव को अपनी मर्यादा में रहकर ही आचरण करना होता है। मर्यादित जीवन ही जीने का सही तरीका है जब भी मर्यादा का उलंघन होता है या हुआ है वहां पतन निश्चित है। पानी, वायु अपनी मर्यादा तोड़े तो विनाश ला देता है भोजन जब मर्यादा से बाहर होता है तो सड़ने लगता है। जीवन में हमारी परिवार के प्रति समाज के प्रति अलग अलग मर्यादा है जैसे बहन के प्रति अलग, माँ के प्रति अलग, भाई के प्रति अलग होती है ऐसे ही श्रावक और साधु की भी अपनी अलग मर्यादा है। इसी प्रकार समाज में राज्य में प्रत्येक पद की भी अपनी मर्यादा एवं गरिमा होती है, आपसी संबंधों की भी अलग मर्यादा होती है अत: हमें उसी दायरे में ही रहना चाहिए। श्री राम ने आजीवन मर्यादित जीवन जिया, अनेक संकट झेले परन्तु कभी अपनी मर्यादा नहीं तोड़ी तभी वह मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम कहलाए। आज सभी क्षेत्रों में मर्यादा का खुला उलंघन हो रहा है, हम सभी अपनी मर्यादा भूल रहें हैं,स्त्रियां अमर्यादित वस्त्र पहन सरेआम घूम रही हैं, इंस्टाग्राम, फेसबुक पर अश्लील नृत्य की नुमायश हो रही है, भद्दी भद्दी रील बनाई जा रही है ,अभिनेत्रियां खुले आम जिस्म की नुमायश कर अश्लीलता को बढ़ावा दे रही हैं । उनका तो यह व्यवसाय है परन्तु भुगतना सम्पूर्ण समाज को पड़ता है।हमारे बच्चों और युवाओं पर इसका बहुत दुष्प्रभाव पड़ रहा है।

 

 

 

 

जो की समाज में गलत वर्ताव को बढ़ावा दे रहा है।
वर्तमान समय की मांग यही है की हम सभी मर्यादित जीवन जियें, मर्यादित वस्त्र पहनें, व्यक्ति के प्रति, समाज के प्रति , देश के प्रति, अपने परिवार के प्रति हमारी क्या मर्यादा है उसे पहचानें। मर्यादा विहीन व्यक्ति का समाज में और परिवार में कोई महत्त्व नहीं होता है।

 

 

यह सम्पूर्ण संसार मर्यादा का द्योतक है नदियाँ झील पर्वत सूर्य चंद्र वर्षा वायु आदि। उसी प्रकार हम सभी को सदैव अपनी वाणी आचरण और जीवन शैली की मर्यादा बनाए रखनी चाहिए।
*संजय जैन सर्राफ*

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