जब तक अंदर का दिया नहीं जलेगा तब तक बाहर का दिया नहीं जल सकता प्रमाणसागर महाराज
इंदौर
हमारे जीवन को प्रभावित करने वाले विषय कषाय है, इन्हीं के प्रभाव में सारा संसार उलझा है,यह विषय कषाय ही हमारी चेतना को मलिन बनाते है,और आत्मा को विक्रित करते है जो लोगधर्म की क्रिया तो करते है,लेकिन विषय कषाय में उलझे रहते है वह आत्म मुग्धता में जीते है”
उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने मोहताभवन रैसकोर्स रोड़ पर प्रातःकालीन प्रवचन सभा में व्यक्त किये।उन्होने कहा कि जब तक अंदर का दिया नहीं जलेगा तब तक बाहर का दिया नहीं जल सकता मुनि श्री ने कहा विषय कषाय से मुक्त होकर दशलक्षण पर्व निकल गये इन दस दिनों में हमने आखिर क्या पाया क्या खोया इस बात की समग्र चिंतन की आवश्यकता है मुनि श्री ने कहा कि हम लोगों की यह विडम्बना है कि हम लोग प्रायः आत्म मुग्धता में जीते है हम कुछ धार्मिक क्रिया कलाप क्या कर लेते हैं,और समझते है कि हमने बहुत कुछ कर लिया। यह तो राख में घी डालना हुआ उन्होंने कहा अंतर में पवित्रता होंना चाहिए उन्होंने कहा कि हमारा मूलभूत लक्ष्य विषय कषाय मुक्त होंना चाहिये। पांच इंद्रियों के विषय कषाय से मुक्ति के लिये ज्ञान और वैराग्य होंना आवश्यक है।सबसे पहली आवश्यकता अपने आपको जानने की है में कौन हुं? और मेरा क्या है? जब तक यह ज्ञान नहीं होता तब तक हमारी चेतना का उत्थान नहीं होता धर्म का मूल उद्देश्य आत्मा की शुद्धी और राग द्वैष की निवृति में है जो लोग आत्म मुग्धता में जीते है उनका कभी उद्धार नहीं हो सकता वह कभी सुखी नहीं हो सकते।ज्ञान आत्मा को सावधान करता है,ज्ञान से वैराग्य उत्पन्न होता है,और अपनी कषाय को कम कर सकता है।







धर्म प्रभावना समिति के प्रवक्ता अविनाश जैन एवं मीडिया प्रभारी राहुल जैन ने बताया 24 सितंबर को मुनि संघ प्रातः6 बजे मोहताभवन से विहार करके देवी अहिल्या विश्वविद्यालय पहुंचेंगे एवं विद्यार्थियों को सम्बोधन एवं आहार चर्या उधर ही संपन्न होगी तथा मध्यान्ह में वापिस आकर सांयकाल का शंकासमाधान मोहताभवन में ही होगा
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
