महाराष्ट्र के सांगली के इतिहास में मुनि श्री विशाल सागर महाराज सानिध्य में प्रथम बार भव्य दस लक्षण शिविर भक्ति आस्था श्रद्धा के साथ स-आनंद संपन्न हुआ

धर्म

महाराष्ट्र के सांगली के इतिहास में मुनि श्री विशाल सागर महाराज सानिध्य में प्रथम बार भव्य दस लक्षण शिविर भक्ति आस्था श्रद्धा के साथ स-आनंद संपन्न हुआ
सांगली
आचार्य भगवन 108 विद्यासागर जी महाराज एवं नवाचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आशीर्वाद से एवं पूज्य मुनि श्री108 विशाल सागर जी महाराज मुनिश्री,धवल सागर जीमहाराज मुनिश्री 108 उत्कृष्ट सागर जी एवं क्षुल्लक 105मंथन सागर जी महाराज के पावन निर्देशन एवं सानिध्य में पश्चिम महाराष्ट्र की धार्मिक नगरी सांगली में10 लक्षण महापर्व में भव्य श्रावक संस्कार शिविर का आयोजन हुआ.। जो युवा पीढ़ी को धर्म से जोड़ते हुए साधना की ओर अग्रसर कर रहा था एवं संस्कारों का शंखनाद कर रहा था।

 

 

 

महाराष्ट्र के सांगली में इतिहास में पहली बार इतना भव्य शिविर लगा जो अपने आप में कीर्तिमान लिख गया नीमच के शिविर संयोजक जितेंद्र जैन बंटी एवं उनके साथ  अमित भैया पुणे, सिद्धार्थ भैया जबलपुर, अमित जैन नीमच ऋषभ जैन नीमच प्रियांशु साहिल जैन शाहपुरा अक्षत जैन मोड़क राजस्थान की पूरी टीम ने चार चांद लगा दिए।

एक और सांगली को जहां औषधि कारक हल्दी की मंडी के रूप में विशेष रूप से जाना जाता रहा है लेकिन इस बार से अब सांगली को धर्म नगरी के रूप में जाना जाएगा जो इतिहास के पन्नों पर अक्षुण्ण रहेगा।

 

 

 

जानकारी देते हुए शिविर के संयोजक बंटी भैया एवं उनके साथी

 

श्री अक्षत जैन मोड़क ने बताया की
इस शिविर में लगभग 1600- 1700 श्रावक श्राविकाओ ने धर्म लाभ लिया, जो भी इस शिविर में सम्मिलित हुए उनका कहना है कि हमारे जीवन में एक नवीन परिवर्तन आया है और इसके कारण हमारे अंदर धर्म की ऊर्जा पल्लवित हो रही है। शिविर का क्रम पूर्णतया अनुशासित रहा।

पूरी दिनचर्या पर यदि गौर करें तो सुबह 4:45 से ही श्रावक श्राविकाए मुनि संघ सानिध्य में धर्म ध्यान में संलग्न हो जाती थी। जिसे देख लगता था कि सांगली नगर धर्म की गंगा में डुबकी लगा रहाहो। सुबह 4:45 पर प्रार्थना 5:00 बजे से 6:00 बजे तक पूज्य मुनि श्री 108 पूज्यथावां सागर जी महाराज के सारे अध्याय में ध्यान एवं प्राणायाम कराया जाता था। 6:00 बजे से 7:30 बजे तक बड़े बाबा सुपर्श्वनाथ भगवान की भव्य अभिषेक एवं शांति धारा पूज्य मुनिश्री 108विशाल सागर जी महाराज के सानिध्य में, और उन्हीं के मुख से शांतिधारा का उच्चारण होता था।

संगीत की स्वर लहरियो को बिखरते हुए संगीतकार आस्तिक भैया एवं ब्रह्मचारी अजीत भैया के सानिध्य में भव 10 लक्षण एवं 16 करण की पूजन विधान, कराकर सभी को भक्ति से ओत प्रोत कर देते थे। और वातावरण भक्ति में ही बना रहता था।मुनि त्रय के मंगल प्रवचन, उसके बाद आहारचर्या ,सामायिक, दोपहर 1:30 बजे से तत्वार्थ सूत्र वाचन,

शिविर की खास बात

इस शिविर में एक खास बात बड़ी विशेषता लिए हुई थी इसमें धर्म अध्ययन एवं साधना को प्रायोगिक रूप से समझे इस हेतु प्रायोगिक वर्कशॉप दोपहर 2:00 से 3:00 बजे तक होता था जो धर्म पर आधारित रहता था। इसी क्रम में 3:00 से 4:00 तक ताकतवर सूत्र कक्षा, 4:45 से प्रतिक्रमण ध्यान एवं जिज्ञासा समाधान पूज्य मुनिश्री 108विशाल सागर जी महाराज जी के सानिध्य में उसके बाद आरती सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं वेयावृत्ति होती थी।

 

 

अक्षत जैन ने अपना अनुभव सांझा किया
शिविर में अपना सक्रिय योगदान देकर रामगंजमंडी मोड़क राजस्थान के अक्षय जैन कहते हैं कि भक्ति आराधना साधना करते हुए शिविर का समापन होने में आ गया पता ही नहीं चला अंतिम दिन चौदस के दिन भव्य ऐतिहासिक रथ यात्रा निकाली गई जिसमें आसपास की समाज जैसे कि समडोली सदलगा नांदेड़ देवडा जयसिंहपुर के भक्तों ने आकर इस ऐतिहासिक शोभायात्रा में चार चांद लगा दिए लगभग ढाई किलोमीटर लंबी शोभा यात्रा पूरे नगर में जैन समाज की प्रभावना कर रही थी जिसने भी इस शोभायात्रा को देखा सच में उसने दातों तले उंगली दबा ही ली और आखिर हो भी क्यों ना यह ऐसी शोभायात्रा आचार्य भगवन विद्यासागर जी महाराज की अनुकंपा से एवं उन्हीं के प्रियशिष्यों के मार्गदर्शन में जो निकली थी।
और उसके बाद वह दिन आ गया जिसका सभी को बेसब्री से इंतजार था जी हां महाराष्ट्र की इस पावन धरा पर एक ऐतिहासिक भव्य महापारणा का आयोजन किया गया जिसमें लगभग 40 भक्तों ने 8- 10 अधिक उपवास की तप साधना की। वही बाहर से पधारे हुए सभी भक्तों के लिए लजीज व्यंजन पूर्ण शुद्धता के साथ बनाए एवं सांगली समाज ने कुशल प्रबंधन किया जिसकी तारीफ सबने की। जिसका प्रबंधन संदीप पाटील सांगली की टीम ने बड़ी ही कुशलता के साथ किया
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट9929747312

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