गुरु भक्ति समर्पण व धरती के पुण्य से धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होते है –आचार्य श्री वर्धमान सागर आचार्य श्री शांतिसागर के उपकारों को उपकृत करने का अवसर शताब्दी महोत्सव की तैयारी बैठक हुई ।

धर्म

गुरु भक्ति समर्पण व धरती के पुण्य से धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होते है –आचार्य श्री वर्धमान सागर आचार्य श्री शांतिसागर के उपकारों को उपकृत करने का अवसर शताब्दी महोत्सव की तैयारी बैठक हुई ।   

पारसोला।  

प्रथमाचार्य शांति सागर जी महाराज ने जैन धर्म, जिनालयों और जिनवाणी का जो संरक्षण किया है, उसके लिए 1105 दिनों तक अनाज सहित अनेक रसों का त्याग कर संयमी जीवन में 18 करोड से अधिक मंत्र जाप कर अपने प्राणों को ख़तरे तक में लगाया है । संयम दीक्षा काल में 9938 उपवास किए ‌जैन समाज का कर्तव्य है कर्ज को चुकाने का। आचार्य पदारोहण शताब्दी महोत्सव एक सुनहरा अवसर आया है उसे कर्ज का कुछ अंश चुकाने का‌ समस्त समाज को तन मन धन से संकल्पित समर्पित होकर इस कार्यक्रम को सफल बनाना हैआचार्य शांति सागर जी महाराज ने अपने जीवन में अनेक प्रकार के उपसर्ग सहन किये।
यह मार्मिक मंगल देशना पंचम पट्टाघीश वात्सल्य वारिघि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने पारसोला जैन समाज की धर्म सभा में प्रकट की। पारसोला में विराजमान वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर ससंघ के सानिध्य में आज दोपहर को कस्बे के समस्त जैन युवा संगठन ,महिला मंडल व बालक बालिका मंडल की सामुहिक बैठक हुई । बैठक में आगामी 13 से 15 ऑक्टोम्बर को आयोजित होने वाले चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर आचार्य पद प्रतिष्ठापन शताब्दी महोत्सव की रूपरेखा तय कर कार्यो का विभाजन कर संगठनों को जिम्मेदारी सौपी । युवा संगठन के मुख्य संयोजक बाबूलाल सरिया ने ससंघ को आश्वस्त करते हुए महोत्सव को भव्य बनाने का आह्वान किया । चातुर्मास कमेटी के उपाध्यक्ष प्रवीण पचौरी ने भव्य शोभायात्रा, मंच व्यवस्था, आवास व्यवस्था, अतिथियों का स्वागत सत्कार,संघ के आहार प्रवास ,प्रचार प्रसार व वात्सल्य भोज सहित सभी कार्यो की विस्तृत जानकारी दी । आचार्य श्री ने बताया कि आचार्य श्री शांतिसागर महाराज ने विषम परिस्थितियों में जैन धर्म की ध्वजा को पूरे देश में फहराया । 1924 में आचार्य पद के साथ चतुर्विध संघ की स्थापना के समय दो मुनि एक आर्यिका व एक एलक संघ के साथ जिनवाणी को संरक्षण कर पूरे देश में मुनि चर्या को बतलाया । ऐसे महामना आचार्य श्री के आचार्य पद प्रतिष्ठापन के 100 वर्ष पूरे हो रहे हैं । संसघ ने इस शताब्दी महोत्सव का आगाज मेवाड़ वागड़ से करने का मन बनाया था । जब पारसोला नगर में 1990 में आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज का आचार्य पद हुआ था और हालही मार्च में पारसोला में भव्य समवसरण जिनबिम्ब का पंच कल्याणक महोत्सव के बाद संसघ ने कस्बे में शताब्दी महोत्सव मनाने की घोषणा की है । ये यहां के श्रद्धालुओं की देव शास्त्र गुरु के प्रति भक्ति, त्याग,समर्पण के साथ इस धरती का पुण्य हैं कि आपको महामना आचार्य श्री के उपकारों को उपकृत करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है । कार्यक्रम का संचालन महावीर कड़वावत ने किया । राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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