चातुर्मास क्यों ? डॉ कल्याण गंगवाल की कलम से
वर्षायोग चातुर्मास संपन्नता की ओर है यह चातुर्मास साधु संत एक स्थान पर रहकर करते हैं लेकिन यह चातुर्मास क्यों इसको लेकर शाकाहार के प्रचार प्रसार में अपना अहम योगदान देने वाले डॉक्टर कल्याण गंगवाल पुणे बताते हैं कि यह चातुर्मास
क्यों इसको लेकर मुख्य बिंदुओं पर वह बता रहे हैं। चातुर्मास आत्मा से परमात्मा की ओर जाने के लिए ! एवम वासना से उपासना की ओर अंह से अहंम की ओर ! अग्रसर होते हुए भोग से योग की ओर बढ़ने की कला को सिखाता है। इसके साथ-साथ हीहिंसा से अहिंसा की ओर बढ़ने का मार्ग देता है।
व्यर्थ प्रदर्शन से दर्शन की ओर अग्रसर होने का एक माध्यम चातुर्मास होता है। इसी के साथ सम्यक दृष्टि बनने के साथ जन जागरण का मार्ग मिल जाता है एकांत की पावन साधना ! में
वृद्धि करते हुए आसक्ति से अनासक्ति की ओर जाने के लिए !
स्वाध्याय के लिए होता है। यह तपस्या का एक मौसम है और


अपने घर लौटने की दस्तक है। जिसकी मुख्यतः सबसे अहम होती है प्रचार प्रसार का यह एक समय बन जाता है। कहां गया है पहला सुख निरोगी काया इस कथन के सार्थक रूप देता हुआ चातुर्मास) अच्छे स्वास्थ्य का समय हैं ! और और जैन शासन की पुण्य प्रभावना के लिए यह चातुर्मास सबसे अमूल्य हो जाता है।
डॉ. कल्याण गंगवाल
एम्. डी. (मेडीसिन)
संस्थापक अध्यक्ष, सर्वजीव मंगल प्रतिष्ठान सदाचार – शाकाहार – व्यसनमुक्ती
