सल्लेखना कर अपने जीवन और मरण को बनाया सफल
मुंबई
जैन कुल में जन्म विरलों को ही नसीब होता है लेकिन इस कुल में जन्म लेकर भी बहुत कम लोग अपने जीवन को सार्थक कर पाते हैं।ऐसा कर दिखाया है 65 वर्षीय मुनि श्री शं सागर महाराज जी ने जिन्होंने एक साल पहले ही गृहस्थ जीवन त्याग कर मोक्ष मार्ग की तरफ कदम बढ़ाया था। वह उन पुण्यात्माओं में से एक थे जिन्होंने अपने अंतिम समय में साधना रत होकर उच्च कोटि का समाधि मरण किया है और अपने जन्म को सफल बनाया है।
एक परिचय
मुनि श्री शं सागर महाराज बने डॉ कमलेश चंद्र जैन गृहस्थ अवस्था में वैटरनरी डॉक्टर थे जो पशुओं की चिकित्सा कर उन्हें रोगमुक्त करते थे लेकिन 60 वर्ष की उम्र में जब ये मूंह के कैंसर से पीड़ित हुए तो अपना अंतिम समय करीब जानकर इन्होंने भगवान की शरण में जाना उचित समझा और आचार्य श्री विभव सागर महाराज जी से 25 अक्टूबर 2023 को क्षुल्लक दीक्षा ले ली। कैंसर की पीड़ा को झेलते हुए भी इन्होंने बहुत ही सहज और शांतिपूर्वक इस संयम पथ के सभी व्रत और नियमों को पूरा किया और बिना कोई इलाज कराये मन में दृढ़ता रख वैराग्य को मजबूत किया।
5 सितंबर 2024 को आचार्य श्री विभव सागर जी के कर कमलों से मुनि दीक्षा लेकर सल्लेखना ली व 8 सितंबर को पूरी चैतन्य अवस्था में बोरीवली मुंबई में समाधि ले ली।






मध्यप्रदेश के भिंड के मेहगांव में जन्मे कमलेश बहुत ही धार्मिक स्वभाव के थे और बहुत कम आयु में ही ये मंदिर में शास्त्रों का प्रवचन करने लगे । तभी से इनके मन में यह भावना थी कि अपने जीवन के कल्याण के लिये कुछ करना है ।
लेकिन गृहस्थ अवस्था में रहते हुए इन्होंने परिवार के प्रति अपने सभी फर्जों को पूरा किया और अंतिम समय निकट जानकर ही इस सांसारिक मोह माया से हमेशा के लिए संन्यास लिया।
मुनि श्री में वैराग्य की भावना कितनी प्रबल थी कि कैंसर की असाध्य बीमारी को अंतिम समय का अलार्म माना जन्म मरण के बंधन से मुक्त हो जाने की राह पर चल पड़े।
अभी इनके परिवार में इनकी धर्मपत्नी और दो बेटियां व एक बेटा है। ये सभी गृहस्थी के साथ साथ धार्मिक कार्यों में भी रुचि रखते हैं।
स्वाती जैन हैदराबाद से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
