जिस दिन स्वार्थी नेता पैदा होता है उसी दिन भ्रष्टाचार का जन्म हो जाता है नियम सागर महाराज
विदिशा
जिस दिन स्वार्थी नेता पैदा होता है,उसी दिन भ्रष्टाचार का जन्म हो जाता है।
उपरोक्त उदगार निर्यापक श्रमण मुनि श्री नियमसागर जी महाराज ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शीतलधाम में व्यक्त किये। मुनि श्री ने कहा पहले देश चलाने वाले राजा चक्रवती हुआ करते थे, जो कि पिछले भव में भौतिक सुख को त्याग कर संयम पथ पर निकल पड़ते थे और अगले भव में दिगम्बर दीक्षा लेकर सिद्ध अवस्था को प्राप्त करता है।






वर्तमान समय प्रजातंत्र का है प्रजातंत्र में नेता को आप भौतिक सुखों के लिये चुनते है, राजा स्वार्थी होगा तो प्रजा भी स्वार्थी होती है, निःस्वार्थ व्यक्ति ही देश को चलाने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि जब परमार्थ के क्षेत्र में आगे बढ़ते है तो सुख बढ़ता जाता है,और दुःख घटता जाता है मुनि श्री ने शनिग्रह की चर्चा करते हुये कहा कि “आत्मा के लिये सबसे बड़ा शनि तो मोहनीय कर्म” जैसे जैसे मोह बढ़ता जाता है तो वह दुःख ही देता है उस मोहनीय कर्म का पता लगाओ जब कारण पता चल जाता है,तो कार्य की सिद्धि हो जाया करती है मुनि श्री ने कहा कि अपने दुःख के कारण को हमें खुद ही पकड़ना पड़ेगा
उदाहरण देते हुये कहा कि आप डाक्टर के पास जाते है तो वह आपकी बीमारी पकड़कर आपको ठीक कर देता है हम भी आत्मा के डाक्टर है और आत्मा की बीमारियों को समझते है आपके चहरे से ही आपकी बीमारी पता चल जाती है चहरा यदि मुर्झाया हुआ है तो हम समझ लेते है कि यह आत्मा मोहनीय कर्म से ग्रसित है और दुख को भोग रहे है मुनि श्री ने कहा कि जैसे जैसे आप सुख साधन को बढ़ाते चले जाते है तो आपको सुख मिलता है या दुःख? सुख साधन बड़े है और यह आत्मा स्वतंत्रता को खोकर परतंत्र होती जा रही है,अपनी आत्मा को सुखी करना चाहते हो तो देव शास्त्र गुरु की शरण में जाकर समर्पित करना होगा तभी आपकी आत्मा स्वतंत्रता को महसूस कर सकती है।
प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया कि मुनि श्री की वाणी को सुनने बाहर से श्रद्धालुओं का आना जारी है। प्रवचन के उपरांत शीतलधाम में राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया जिसमें मुनि श्री संघ के साथ उपस्थित रहे एवं बड़ी संख्या में श्रावक उपस्थित थे। कार्यक्रम उपरांत सभी को मिष्ठान वितरित किया गया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
