तिरंगे में केसरिया रंग सत्य का, सफेद रंग अहिंसा का, हरा रंग शांति का तथा अशोक चक्र की 24 रेखा जैन 24 तीर्थंकरों का प्रतीक है आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज

धर्म

तिरंगे में केसरिया रंग सत्य का, सफेद रंग अहिंसा का, हरा रंग शांति का तथा अशोक चक्र की 24 रेखा जैन 24 तीर्थंकरों का प्रतीक है
आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज
पारसोला

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज me 15 अगस्त के विशेष पर्व पर आचार्य श्री ने अपनी मंगल देशना में बताया किस्वतंत्रता हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है ।आज देश में राष्ट्रीय पर्व के रूप में स्वतंत्रता दिवस मनाया जा रहा है। लाल किले पर प्रधानमंत्री ने भारतीय तिरंगा लहराया ।वास्तव में देखा जाए तो जिनका शासन था वह अंग्रेज देश छोड़कर चले गए किंतु उनकी संस्कृति यही छोड़ कर गए जिस देश ने अपना लिया ।ईस्ट इंडिया कंपनी ने 200 वर्ष तक हमारे देश भारत पर राज्य किया हमारे देश का प्राचीन नाम भारत था अंग्रेजों के जाने के बाद लोग विश्व इसे इंडिया कहने लगा कहते हैं कि अंग्रेजो के शासन में सूर्य कभी अस्त नहीं होता था क्योंकि उनके पूर्व दिशा से लेकर पश्चिम दिशा तक राज्य साम्राज्य था। आचार्य श्री ने राष्ट्रीय पर्व प्रतीक झंडे के ऊपर प्रवचन में बताया कि भारत देश का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा है जिसमें तीन रंग केसरिया, सफेद ,और हरा और मघ्य में अशोक चक्र लगा है आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रवचन में बताया कि केसरिया रंग सत्य धर्म का प्रतीक है, सफेद रंग अहिंसा का प्रतीक है और हरा रंग शांति का प्रतीक है अशोक चक्र में 24 रेखा लाईन हैं जो 24 तीर्थंकरों ने धर्मप्रवर्तन किया है उसका द्योतक है । राजेश पंचोलिया अनुसार आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रवचन में आगे बताया कि भारत देश को आजाद करने में जैन धर्म के लोगों ने तन मन और धन से अपना योगदान देकर प्राणों का बलिदान भी किया है। आज देश में सर्वाधिक आय राजस्व जैन समाज द्वारा टेक्स कर के रूप में दिया जा रहा है। किंतु हमारा जैन धर्म संगठित नहीं होने के कारण हमारे सिद्ध क्षेत्र मंदिर परतंत्र होते जा रहे हैं जबकि इन जिनालय्यों को स्वतंत्र करने के लिए प्रथमाचार्य आचार्य शांति सागर जी महाराज ने 1100 से अधिक दिनों तक अन्न आहार का त्याग किया था। महात्मा गांधी ने जैन धर्म के प्रमुख सिद्धांत अहिंसा के बल पर ही इस देश को आजाद कराया। जैन धर्म के सिद्धांत विश्व में आज भी प्रासंगिक है पूरा विश्व अहिंसा छोड़कर हिंसा में लगा है हिंसा का तांडव नृत्य हो रहा है। पड़ोसी देश बांग्लादेश इसका उदाहरण है जहां हिंदुओं पर अत्याचार् और हमला हो रहा है ।आचार्य श्री ने धार्मिक दृष्टिकोण से बताया कि हमारी आत्मा भी कर्मों के कारण पराधीन है आत्मा पर लगे राग द्वेष विषय भोगों को जब तीर्थंकरों ने तप संयम रत्नत्रय धर्म से दूर कर आत्मा को स्वतंत्र कराया। स्वतंत्रता दिवस यही संदेश देता है कि आपको अपनी आत्मा को कर्मों से स्वतंत्र करना है ।आपके अच्छे कार्य करने से पुण्य की प्राप्ति होती है गलत कार्य करने से पाप की प्राप्ति होती है ।भगवान आदिनाथ ने दीक्षा के पूर्व 83 लाख वर्षों तक कर्मभूमि भारत में जीवन यापन के लिए सूत्र बताएं आज भारत देश को सावधान रहने की जरूरत है। व्यसन पर चर्चा करते हुए आचार्य श्री ने बताया कि व्यसन हमारे जीवन को बर्बाद कर रहे हैं आज की राजनीति धर्म विहीन, सिद्धांत विहीन हो रही है व्यसन में विवेक हीनता , चरित्र विहीन है शिक्षा हमारी दूषित हो रही है पहले गुरुकुल के माध्यम से संस्कारों की शिक्षा दी जाती थी वर्तमान में लौकिक शिक्षा से अर्थ उपार्जन कैरियर निर्माण की शिक्षा मिलती है व्यापार भी अब नैतिकता विहीन हो रहा है इंसान मानवता विहीन है देश में चरित्र और ज्ञान त्याग विहीन की पूजा हो रही है त्याग की पूजा नहीं होती ।व्यसन छोड़ने पर ही हमारी आत्मा कर्मों से मुक्त होगी
राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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