ज्ञानी सरल होता है हमेशा सिर झुकाकर रहता है पट्ट गणिनी विज्ञमती माताजी
एटा
पुरानी बस्ती स्थित श्री दिगंबर जैन बड़े मंदिर में भारत गौरव गणिनी आर्यिका105 श्री विशुद्धमति माताजी के पावन सानिध्य एवं आशीर्वाद से भक्तामर स्तोत्र की प्रशिक्षिका प्रज्ञा पद्मिनी पट्ट गणिनी आर्यिका105 श्री विज्ञमती माताजी ने बताया कि आचार्य मानतुंग स्वामी के महाकाव्य से स्फुटित हुआ अनन्य प्रेम भक्त और भगवान के बीच दिखाई देता है ,दिगंबर साधु की साधना को स्फुटित करने हेतु भक्तामर स्रोत की रचना की गई थी, परमात्म दर्शन करने हेतु महत्वाकांक्षा की गीली लकड़ी से उठे हुए धुयें फैली विकृति परमात्म दर्शन कराने हेतु वह धुआँ भी अंजन का कार्य कर गया! बताया गया है जब तक मन शांत नहीं है और लक्ष्य बनाया नहीं है तब तक भटकते रहोगे वो लक्ष्य हमारा नहीं है जिस पथ पर भीड़ हो, अज्ञानी जब जानकारी को ज्ञान समझ लेता है तब चारों ओर दुर्गंध फैलाने लगता है ,
आचार्य मानतुंग स्वामी भी इसी दुर्गंध के शिकार हुए थे! अपने से बड़ों का बहुमान करे बाल्टी को कुएं में डालते हैं जब तक बाल्टी को ना झुकाए तब तक वह भरती नहीं है यह तो चेतन का घाट है इसको जब तक हम अपने को आराध्य के समक्ष नही झुकाएंगे तब तक ज्ञान नीर से कैसे भर पाएगी! ज्ञानी हमेशा सर झुका कर रहता है सच्चा भक्त किसी की परवाह नहीं करता उसे अपने हर कदम पर विश्वास होता है उसको पता है कि मेरे कदम सत मार्ग की ओर जा रहे हैं ,आपके जीवन में यह पुण्य का अवसर आया है जो महान कार्य आज तक किसी ने नहीं किया वह कार्य चातुर्मास काल में हम आपके समक्ष प्रशिक्षण के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास करेंगे !






उन्होंने कहा अखंड चढ़ाओं खंडित मत चढ़ाओं, अखंडित पहनो खंडित मत पहनो, आज कल कटे फटे कपडे पहनने का फैशन चल गया है यही फैशन तुम्हारे पतन का कारण है बुद्धि विवेक से काम करो,तेज आंधी कोमल घास फूस का कुछ नहीं बिगाड़ पाती लेकिन बांस के अकड़े वृक्ष जड़़ से टूट जाया करते है !एक काव्य के माध्यम से उन्होंने बताया की आचार्य मानतुंग स्वामी कहते हैं यद्यपि मैं अल्पज्ञ हूँ मेरे पास बुद्धि नहीं है फिर भी मैं आपकी भक्ति करने को उद्यत हो रहा हूं जिस तरह जल में चंद्रमा के प्रतिबिंब को देखकर उसे पाने की जिज्ञासा भला एक बालक के सिवाय और कौन कर सकता है,? इसी भांति में भी आपकी भावपूर्वक सच्ची स्तुति करने को तैयार हो रहा हूं! जैन दर्शन विषय वस्तु छोटी नहीं है बहुत वृहद है, हमारा लक्ष्य शुद्ध ज्ञान से केवल ज्ञानी होने की होनी चाहिए सिर्फ पढ़ना हमारा लक्ष्य नहीं अपितु जीवन में धारण करना हमारा लक्ष्य होना चाहिए!
शिविर में श्रीमान योगेश जैन, विपिन स्वामी,गजेन्द्र जैन, आनंद जैन, निर्मल जैन नितिन जैन संजय जैन ,आलोक जैन, अनिल जैन, राजेश जैन एवं श्रीमती सरोज जैन, योगाचार्या वीनेशजैन , प्रीतिजैन आरती जैन,प्रियंका जैन अल्का जैन, बबिता जैन ,रश्मि जैन ,शैलेश जैन विनीताजैन रानी जैन, राशि जैन, अर्चना जैन सुषमा जैन टिया जैन,,बबली जैन ममता जैन, विनोदप्रभा जैन साधना जैन आदि उपस्थित थे
मीडिया प्रभारी सुनील जैन बांदा ने बताया दिनांक 15 अगस्त दिन गुरुवार श्रावण शुक्ल दशमी को प्रातः 7:30 बजे से पुरानी बस्ती स्थित बड़े मंदिर जी में श्री गणधर वलय स्तोत्र सेमिनार पुरस्कार वितरण समारोह रखा गया है
बबिता जैन एटा से प्राप्त जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312
