यम सल्लेखना के साथ क्षपकराज क्षुल्लक श्री105 चिंतन सागर जी महाराज का निर्यापक श्रमण मुनि श्री वीर सागर महाराज सन्निधि में हुआसमाधि मरण

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यम सल्लेखना के साथ क्षपकराज क्षुल्लक श्री105 चिंतन सागर जी महाराज का निर्यापक श्रमण मुनि श्री वीर सागर महाराज सन्निधि में हुआसमाधि मरण
नेमावर
समाधि सम्राटआचार्य श्री 108विद्या सागर जी महाराज के शिष्य एवं आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती निर्यापक श्रमण श्री वीर सागर जी महाराज के सिद्ध साधना वर्षायोग सिद्धादोदय सिद्ध क्षेत्र नेमावर में भक्ति भाव के साथ हो रहा है।

 

 

उन्हीं की चरण सन्निधि में विगत दिनों पूर्व सिद्ध साधना को अग्रसर करते हुए क्षेत्र पर साधना रत 74 वर्षीय क्षुल्लक श्री 105चिंतन सागर जी महाराज ने अपनी भावना आचार्य श्री समय सागर जी महाराज एवं निर्यापक श्रमण श्री वीर सागर जी महाराज के श्री चरणों में समाधि सल्लेखना हेतु अपनी भावना रखी।

 

 

भावना रखते हुए तीन दिनों पूर्वक्षुल्लक श्री ने सभी से क्षमा याचना करके समाधि को कदम बढ़ाया।एवम सोमवार की बेला अष्टमी के पुनीत अवसर प्रातः काल 6 बजे में मुनिश्री वीरसागर जी के मार्गदर्शन सानिध्य में पूर्ण जागृति के साथ चारों प्रकार के अन्न जल का त्याग किया। इसके उपरांत 11:30 बजे मुनिश्री द्वारा सम्पूर्ण वस्त्र आदि का भी त्याग करा दिया गया था।

 

दोपहर 2:50 बजे मुनिश्री के श्रीमुख से अरिहंत सिद्ध नमोकार मंत्र सुनते हुए समाधि मरण हुआ। निश्चित रूप से यह एक उत्कृष्ट मरण कहा जाता है और एक साधु का और एक श्रमण यही जीवन का अंतिम उद्देश्य होता है कि उसकी समाधि संलेखना पूर्वक गुरु चरणों में हो और तीर्थ क्षेत्र पर हो।
धन्य है क्षपक महाराज
हर संत यही भाव करता है कि इतना तो कर दो स्वामी जब प्राण तन से निकले होवे समाधि पूरी यह भावना मे भाऊ देहांत के समय में तुमको ना भूल पाऊं
संकलित अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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