ज्ञान मात्र से व्यक्ति का कल्याण नहीं होता, कल्याण उस ज्ञान का अनुकरण करने से होता है समय सागर महाराज
खजुराहो
स्वर्णोदय तीर्थ खजुराहो की पावन भूमि पर विराजमान आचार्य श्री 108 समय सागर महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि ज्ञान तो प्रत्येक जीव के पास है। किंतु उस ज्ञान द्वारा उसको आनंद की प्राप्ति नहीं हो पा रही।
क्योंकि वह ज्ञान शुद्ध नहीं है। उदाहरण के माध्यम से बताया कि नाव और पुल दोनों ही नदी को पर लगाने के कारण हैं, किंतु दोनों में अंतर है। पुल नदी से दूसरे को पार तो करा सकता है पर खुद नदी पार नहीं करता। जबकि नाव दूसरे को भी नदी पार कराती है। और खुद भी नदी पार कर लेती है।

इसी प्रकार अभक्ष्य जीव अपने ज्ञान के माध्यम से दूसरे का सहयोग करने में लगा होता है। किंतु स्वयं उस ज्ञान का उपयोग नहीं करता। वह दूसरों को तो उपदेश दे रहा है। किंतु खुद उस मार्ग पर नहीं चल रहा, तो यह पार कैसे होगा। आचार्य श्री ने आगे कहा कि ज्ञान मात्र से कल्याण नहीं होता, कल्याण ज्ञान के अनुकरण से होता है। इसीलिए ज्ञान के प्रयोग की आवश्यकता है।



बिना प्रयोग के कल्याण संभव नहीं है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि डॉक्टर रोगी को पर्चे में दवा लिखकर देता है। और कहता है की इस दवा को घोलकर पी लेना। परंतु रोगी दवाई की जगह पर्चे को घोल के पीले तो उसकारोग ठीक नहीं होगा। दवा पीने के लिए भी उसको ज्ञान की आवश्यकता है। ज्ञान के साथ इसका प्रयोग भी होना चाहिए। ज्ञान चारित्र के लिए, चारित्र ज्ञान के लिए नहीं।
पचेंद्रीय के विषयों का ग्रहण संसार का कारण है, इतना समझ में नहीं आ रहा है।
आचार्य श्री ने आगे कहा कि ज्ञान रथ पर प्रकाशक है, ज्ञान से आत्मा को प्रकाश में लाना है। धर्म की प्रभावना भी करते रहना चाहिए और आत्मा को भी प्रकाशित कर लेना चाहिए। आत्मा रत्नत्रय से प्रकाशित होती है। महाराज श्री ने कहा कि बाहुबली भगवान ने एक वर्ष तक खड़े होकर घनघोर जंगल में , चारों प्रकार के आहार का त्याग कर पंच परमेष्ठी की आराधना की।
महाराज श्री ने कहा कि दुखी व्यक्ति को दिया हुआ दान करुणा दान है। सदपात्र को दिया हुआ दान पुण्य अर्जन में कारण होता है। ज्ञान का उपयोग नहीं तो ज्ञान का कोई मतलब नहीं। उसकी उपयोगिता प्रयोग करने में ही है। ज्ञान द्वारा प्रकाश मिलता है तब ज्ञान का उपयोग अपने लिए करना चाहिए। चश्मे की उपयोगिता आंख पर लगाकर देखने में है। ना कि उसको माथे के ऊपर रखने में।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
