ये संसार बिना स्वार्थ के नहीं चलता प्रसन्न सागर महाराज
निखिल पीठ
अलकनंदा नदी के किनारे गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने कहा कि ये तीन कार्य व्यर्थ है –सबको खुश करने की कोशिश,बदले का भाव, और गुजरे हुए वक्त में डूबे रहना।संसार स्वार्थ से चलता है आप कुछ भी करो, कुछ भी कहो, ये संसार बिन स्वार्थ के नहीं चल सकता।
महाराज श्री ने कहा बेटे चार प्रकार के होते हैं –पहला पुत्र – एक पिछले जन्म का लेनदार बेटा। उसे आप कितना भी पढ़ाओ, कितना भी लिखाओ, उसे बड़ा करो। उसका विवाह करो और बस चल बसता है। लेन देन पूरा हुआ और चल बसा, तो समझना वो लेनदार पुत्र था।दूसरा पुत्र पिछले जन्म का बेरी भी पुत्र होकर आता है। ऐसा पुत्र कदम कदम पर दु:ख देता है, छाती पर मूंग डालता है, नाक में दम करके रखता है, ऐसा पुत्र – पुत्र के रूप में दुश्मन होता है और पिछले जन्म का पूरा बदला लेता है।
तीसरा पुत्र उदासीन पुत्र होता है, ना मित्र होता है ना बैरी होता है, ऐसा पुत्र मां बाप को ना सुख देता है, ना दु:ख देता है,, बस कहने का पुत्र होता है, बस कहने का।

चौथा पुत्र होता है सेवक पुत्र। पिछले जन्म में आपने किसी की सेवा की और वही आपका पुत्र बनकर आ गया, ऐसा पुत्र सेवा करके सुख देता है।



मां बाप की जो – जी जान से सेवा करता है, बुढ़ापे का सहारा बनता ही है। मां-बाप की कीर्ति को भी बढ़ाता है।
आप कौन से नंबर के बेटे हैं—-? नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

