सिद्धों की आराधना के बिना मोक्ष का लक्ष्य सिद्ध नहीं हो सकता है स्वस्ति भूषण माताजी

धर्म

सिद्धों की आराधना के बिना मोक्ष का लक्ष्य सिद्ध नहीं हो सकता है स्वस्ति भूषण माताजी

अंबाह
परम पूज्या भारत गौरव स्वस्ति धाम प्रणेता गणिनी आर्यिका 105 स्वस्ति भूषण माताजी ने सोमवार को सिद्धचक्र महामंडल विधान का महत्व बताते हुए कहा कि हर एक श्रद्धालु को सिद्धचक्र महामंडल विधान करना चाहिए। इसका महत्व समझाते हुए कहा कि क्योंकि अंतिम लक्ष्य के रूप में संसारी प्राणी मोक्ष नहीं पा सकता है इसीलिए सिद्धों की अराधना के बिना मोक्ष का लक्ष्य सिद्ध नहीं हो सकता।

 

 

 

 

 

 

पूज्य माताजी सोमवार की बेला में परेड चौराहे पर स्थित दिगंबर जैन पारसनाथ मंदिर में सिद्धचक्र महामंडल विधान की बेला में अपना उद्बोधन दे रही थी पूज्य माता जी के सानिध्य में मंदिर में विश्व शांति हम जगत कल्याण की कामना को लेकर सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन किया गया है। माताजी ने बोलते हुए कहा कि जैन दर्शन में सिद्धचक्र महामंडल विधान का विशेष महत्व बताया गया है। सिद्ध शब्द का अर्थ भी उन्होंने समझाया सिद्ध शब्द का अर्थ है कृत्य कृत्य चक्र का अर्थ है समूह मंडल का अर्थ एक प्रकार के वृत्ताकार यंत्र से है। इनमें अनेक प्रकार के मंत्र व बीजाक्षरो की स्थापना की जाती है।

मंत्र शास्त्र के अनुसार इसमें अनेक प्रकार की दिव्य शक्तियां प्रकट हो जाती हैं। सिद्धचक्र महामंडल विधान समस्त सिद्ध समूह की आराधना मंडल की साक्षी में की जाती है। जो हमारे समस्त मनोरथ ओं को पूर्ण करती है। अष्टानिका महापर्व का विशेष महत्व होता है महापर्व के अवसर पर देवलोक भी नंदीश्वर दीप से आकर सिद्ध भगवान की आराधना करते हैं।

 

इस महापर्व में स्वर्ग से इंद्र भी मंदिरों में भगवान की भक्ति करने आते हैं। फाल्गुन, कार्तिक व आषाढ़ के अंतिम 8 दिन अष्टमी से पूर्णिमा तक यह पर्व आता है। इन 8 दिनों मे सिद्धों की यह विशेष आराधना के लिए सिद्धचक्र विधान किया जाता है।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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