बाहर व्यक्ति अच्छा दिखे तो वह जरूरी नहीं की अंदर से भी अच्छा हो प्रमाण सागर महाराज
इंदौर
परम पूज्य मुनि श्री 108 प्रमाण सागर महाराज ने रेसकोर्स स्थित मोहता भवन में मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि शरीर से दुर्बल व्यक्ति सुखी रह सकता है, लेकिन स्वभाव से दुर्बल व्यक्ति कभी सुखी नहीं रह सकता।
महाराज श्री ने कहा कि बाहर से व्यक्ति अच्छा दिखे तो जरूरी नहीं कि वह अंदर से भी अच्छा हो। जब तक चेतना को विकृत करने वाले तत्वों की समझ आपके अंदर नहीं आएगी तब तक आप अपने अंदर दोष, काम, क्रोध, मान,माया, लोभ से नहीं बच सकते।



उन्होंने कहा कुछ लोग इतने अधीर होते हैं कि वह बात-बात पर तुरंत प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं। कोई बात कर रहा है उनके बीच में आकर बोलना, टोकना यह भावगत कमजोरी कहलाती है और अपशब्द बोलना, झूठ बोलना, व्यसन वह स्वभाव गत कमजोरिया हुआ करती है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
