मरण सुमरण हो, समाधि मरण हो ऐसा प्रयास करना चाहिए आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

धर्म

मरण सुमरण हो, समाधि मरण हो ऐसा प्रयास करना चाहिएआचार्य श्री वर्धमान सागर जी
पारसोला
सन्मति भवन में विराजित आज की धर्म सभा में आचार्य श्री वर्धमान सागर ने बताया कि रत्नत्रय के तीन प्रमुख सम्यक दर्शन ,सम्यक ज्ञान, सम्यक चारित्र से मोक्ष मार्ग प्राप्त होकर जन्म जरा मृत्यु का विनाश होता है ।और कृत्रिम जिनालय जन्म मरण मिटाने के साधन है । देव शास्त्र गुरु चरण में ही रत्नत्रय धर्म का मार्ग मिलता है क्योंकि मोक्ष मार्ग ही अविनाशी फल है लौकिक फल तो नश्वर होता है इसलिए आपको पुण्य का बंध करना चाहिए पाप के बंध से कर्मों का आश्रव होता है जैसे कार्य करेंगे वैसे ही कर्मों का बंघ होगा मन को देव शास्त्र गुरु की भक्ति में लगाने से शाश्वत सुख की संपदा प्राप्त होगी पांच इंद्रीय विषय भोगों से नर्क और तिर्यच गति का दुख प्राप्त होगा। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने सन्मति भवन में किशनगढ़ से पधारे भक्तों की धर्म सभा में प्रकट की। राजेश पंचोलिया अनुसार चातुर्मास में आचार्य संघ और संत समागम का लाभ लेने के लिए राजस्थान के अनेक नगरों से भक्त पधार रहे हैं इसी श्रृंखला में पारसोला आज किशनगढ़ मय‌ हो गया आचार्य श्री के अनन्य भक्त महावीर ,विमल ,महेंद्र पाटनी उरसेवा परिवार 300 अधिक परिजनों भक्तों को लेकर आचार्य श्री के दर्शन, आशीर्वाद ,चरण वंदना हेतु पारसोला पधारे। भौतिकवादी युग में लोग विवाह की सालगिरह बड़े-बड़े पर्यटक स्थल होटल में मनाते हैं किंतु किशनगढ़ के श्रीमती कल्पना महेंद्र पाटनी उरसेवा वालों ने अनूकरणीय भक्ति का उदाहरण प्रस्तुत कर विवाह के 25वें वर्ष पूर्ण होने पर वर्ष में प्रतिमाह आचार्य साधु संघ सानिध्य में धार्मिक विधान का आयोजन का निर्णय लिया इसी के अंतर्गत आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के संघ सानिध्य में पारसोला में श्री जी के दर्शन अभिषेक पश्चात आचार्य श्री की चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट की। आपके चौके में आचार्य श्री के आहार का सौभाग्य भी आपको प्राप्त हुआ दोपहर को श्रीजी की विशाल शोभा यात्रा आचार्य वर्धमान सागर जी संघ सानिध्य में श्याम वाटिका पहुंची जहां पर श्री जी के पंचामृत अभिषेक पश्चात आचार्य वर्धमान सागर विधान की विशेष पूजन सुप्रसिद्ध गायक अजीत पाटनी कुचामन सिटी द्वारा कराई गई।तीन स्तरीय विधान की रचना मुनिश्री हितेंद्र सागर जी ने की प्रथम और द्वितीय वलय में 9 अर्घ तथा तीसरे वलयमें 18 कुल 36 अर्घ भक्ति भाव से नृत्य करते हुए मंडल विधान पर पाटनी परिवार और किशनगढ़ के भक्तों ने अर्पित किए। सोधर्म इंद्र श्रीमती विनीता विमल पाटनी एवं कल्पना महेंद्र पाटनी द्वारा विधान पर अर्घ समर्पित किया ।इस अवसर पर आचार्य श्री के पूजन के पूर्व किशनगढ़ से पधारे अतिथियों द्वारा पूर्वाचार्य को अर्घ समर्पित किए गए इस विधान में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के गुणों का गुणानुवाद किया गया है। जिसका जिसका वाचन मुनि हितेंद्र सागर जी आर्यिका महायशमति माताजी एवं अन्य साधुओं द्वारा किया गया। पारसोला समाज अध्यक्ष जयंतीलाल कोठारी तथा चातुर्मास समिति के अध्यक्ष ऋषभ पचोरी तथा अन्य पदाधिकारी द्वारा गौरवशाली परंपरा अनुसार अतिथियों का शाल श्रीफल पगड़ी से स्वागत किया गया। राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी9929747312

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