चारित्रवान व्यक्ति लोक में सम्मान को प्राप्त होता है विज्ञानमति माताजी
बांसवाड़ा
जिसके जीवन में चारित्र होता है वह पूज्यता को प्राप्त करता है। खांदू कॉलोनी स्थित श्रेयांश नाथ दिगंबर जैन मंदिर में मंगल प्रवचन देते हुए आर्यिका 105 विज्ञान मति माताजी ने कहा कि जिसके जीवन में चारित्र नहीं वह पुज्यता को प्राप्त नहीं हो सकता है। चारित्रवान व्यक्ति लोक में सम्मान को प्राप्त होता है। जिसके जीवन में आचरण नहीं वह व्यक्ति धनवान होते हुए भी निर्धन है।
माताजी ने कहा कि चारित्र से व्यक्ति पूज्य बनता है। और चारित्र के बिना व्यक्ति सम्मान को प्राप्त नहीं हो सकता। जिसका आचरण सही नहीं है, वह व्यक्ति लोक में विश्वास को प्राप्त नहीं होता।






क्षमावान सत्यवान व्यक्ति ही संसार को जीत सकता है। क्षमा और सत्य यह दो गुण जिसके पास होते हैं वह संसार में किसी भी क्षेत्र में हार नहीं सकता है।
क्षमावान एवं सत्यवान संसार की कोई भी कठिन परिस्थिति में घबराते नहीं है। वह उस कठिन परिस्थिति के स्वरूप का चिंतन करता है और उस समस्या को सुलझा कर जीत कर बाहर आता है। आज हम मंदिर में भी भोगों के प्रति आकर्षित हो रहे हैं। मंदिर में चंदन तिलक लगाने के लिए दर्पण और सीक का प्रयोग करते हैं। दर्पण में मुख देखकर ही चंदन लगाते हैं। यह एक प्रकार का भोग है। जो व्यक्ति दर्पण में मुख देखकर तिलक लगाता है, वह स्त्री वेद का बंध करता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
