जब तक अहम रहेगा तब तक वहम रहेगा पूर्णमति माताजी
ग्वालियर
परम पूजनीय आर्यिका पूर्णमति माताजी ने साक्षी एनक्लेव में अपने मंगल प्रवचन में कहा कि दुनियादारी और बच्चों के लिए हमें कण-कण जोड़ना पड़ता है, लेकिन सिद्धता प्राप्त करने के लिए हमें कण-कण छोड़ना पड़ता है। जब तक अहम रहेगा तब तक वहम रहेगा। प्रभु तक पहुंचने के लिए हम और वहम से ऊपर उठना होगा। क्योंकि अहम और वहम हमारे लक्ष्य प्राप्ति में रुकावट बनते हैं।
पूज्य माताजी ने कहा कि मनुष्य अनादि काल से कर्मों के संग रहते हुए पर पदार्थ को अपना मान रहा है, और जो अपना आत्म चेतन है उसे भूला बैठा है, तुम णमोकार मंत्र की कार में बैठकर सिद्ध भगवान तक पहुंच सकते हैं। तुमसे पूछा जाए कि पाप बड़ा या पुण्य, सभी जानते हैं पुण्य ही बड़ा है, लेकिन फिर भी पाप करते हैं। और फल पुण्य का चाहते हैं। जब पाप अधिक करोगे तो फल भी पाप ही भोगना पड़ेगा।
माताजी ने कहा कि धर्म के पथ पर चलना है तो कथनी और करनी का अंतर मिटाना होगा। जुबान पर कुछ और और अंतरंग में कुछ
और, इस अंतर को मिटाओ। भक्ति गली आति साकरी, जाजमे दो न समाये, जब प्रभु थे तब मैं नहीं, और अब मैं हूं तो प्रभु नहीं। अपने जीवन की नैया प्रभु के हवाले कर दो।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
