*अन्तर्मना उवाच* (25 जुलाई!)कुलचाराम हैदराबाद अपनी अच्छाइयों पर इतना भरोसा रखो कि**जो तुम्हें खोयेगा वो यक़ीनन जिन्दगी भर रोयेगा..!*
*अपनी अच्छाइयों पर इतना भरोसा रखो कि*
*जो तुम्हें खोयेगा वो यक़ीनन जिन्दगी भर रोयेगा..!*
*जिंदगी में तीन मित्र है –* पहला मित्र *ज्ञान,* दूसरा *धन* और तीसरा *विश्वास।* तीनों सदा एक साथ ही रहते हैं। एक समय ऐसा आया कि तीनों को अलग अलग होना पड़ा। जब अलग अलग हुए तो तीनों ने अपनी अपनी बात कही।
*ज्ञान ने कहा -* हम अपनों से स्कूल, सत्संग में ही मिलेंगे। *धन ने कहा -* मैं धन पतियों के पास मिलूंगा। *विश्वास* दोनों की वार्ता सुन रहा था। कुछ समय मौन रहा। धन ने कहा – *विश्वास भाई* आप भी कुछ बोलो-? तब *विश्वास ने रोते हुए कहा -* एक बार चला गया तो फिर जिंदगी भर नहीं मिलूंगा। *प्रकृति में विवेक हो, वृत्ति में विचार, सद्भाव हो और व्यक्ति के व्यक्तित्व में विश्वास हो।*

*आज इंसान ने धन खूब कमाया। ज्ञान का अर्जन भी किया। परंतु विश्वास को खो दिया।* इंसान को संसार पर, परिवार पर, व्यापार पर, डॉक्टर पर, ड्राइवर पर, तो विश्वास है। पर धर्म पर, शास्त्र पर, गुरुओं पर, विश्वास नहीं है। नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त संकलन के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
