जो व्यक्ति स्वभाव को छोड़कर विभाव को धारण कर लेता है उसके जीवन में सरलता समाप्त हो जाती है समय सागर महाराज
पजनारी
निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 समय सागर महाराज ने जीवन में सरलता को धारण करने पर बल दिया। उन्होंने उदाहरण के माध्यम से समझाया की नाव के माध्यम से नदी को पार किया जा सकता है। यदि वह नाव लकड़ी की है तो वह स्वयं भी पार होती है, और दूसरे को भी नदी से पार करा देती है। परंतु यदि वह नाव पाषाण की हो तो वह खुद भी डूब जाएगी।और उसमे सवार होने वाले को भी डुबो देती है।
उन्होंने कहा जो व्यक्ति स्वभाव को छोड़कर विभाव को धारण करता है, उसके जीवन में सरलता समाप्त हो जाती है। और कुटिलता आ जाती है, और विषमता के साथ उसका जीवन चलता है। स्वभाव को प्राप्त करना चाहते हो तो सरलता को जीवन में धारण करना होगा और कुटिलता को छोड़ना
होगा। पूज्य मुनि श्री ने अतिशय क्षेत्र पजनारी में यह बात अपने प्रवचन में कही।

मुनि सेवा समिति सदस्य मनोज जैन लालो ने बताया कि मंगलवार को अतिशय क्षेत्र पजनारी में आर्यिका 105 वैराग्य मति माताजी एवंआर्यिका 105 अपूर्व मति माताजी संघ ने पूज्य मुनि संघ के दर्शन किए और इन मांगलिक पलों में आर्यिका संघ का दीक्षा दिवस समारोह मनाया गया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
