यदि कोई हितेषी है तो जहर भी अमृत में बदल जाएगा सुधा सागर महाराज
सागर
डाकू आपको रुला कर के सब कुछ कहलवाता है, और साधु हसवा करके सब कुछ कहलवाता है। पुलिस के सामने अपराधी अपराध कबूल कर लेगा तो वह उसे जेल भेज देते हैं, और हमारी अदालत में जो अपराध कबूल जाता है उसे हम गले लगा लेते हैं जेल नहीं भेजते हैं। यही अंतर है आप और हम में।
यह उद्बोधन निर्यापक मुनि श्री सुधा सागर महाराज ने भाग्योदय तीर्थ में कहे उन्होंने कहा कि सीता नदी किनारे पर बैठी थी तो हिरण घेर लेते थे। और जब राम लक्ष्मण जब नदी के किनारे आते हैं तो सारे हिरण भाग जाते हैं। श्री राम ने पूछा ऐसा क्या करती हो। तब सीता जी ने कहा कि एक कंधे पर टंगा धनुष देखकर वह डरते हैं वह मुझे भी देखते हैं कि मेरे पास धनुष बाण नहीं है।


मुनि श्री ने कहा कि चार महीने में जो कहूं उसमें कठिन और असंभव शब्द नहीं लगना चाहिए। इस बात पर ध्यान रखें क्योंकि मैं आपका हितेषी हूं। जिनेंद्र देव की वाणी में कभी कठिन शब्द नहीं लगना चाहिए। भगवान की वाणी, और उनके आदेश को कठिन क्यों मानते हो। दिनेंद्र देव की वाणी में चमत्कार होते हैं। इसी प्रकार गुरु सदा हितकारी होते हैं। वह तुम्हारा कभी भी अहित नहीं कर सकते। उनकी बताई बात को कठिन मत मानो और हितेषी भी मेरा कभी अहित नहीं कर सकता। चुक जाए तो भी अहित नहीं कर सकता है। सर्व हितेषी से चूक हो जाए तो कभी तुम्हारा गलत नहीं होगा। अमृत के स्थान पर जहर देने वाला मिल जाए, यदि कोई हितेषी है तो जहर भी अमृत में बदल जाएगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
