भगवान शीतल नाथ की इस पवित्र भूमि पर मेरा रोम रोम पुलकित है नियम सागर महाराज

धर्म

भगवान शीतल नाथ की इस पवित्र भूमि पर मेरा रोम रोम पुलकित है नियम सागर महाराज
विदिशा
भगवान शीतलनाथ की इस पवित्र भूमी पर मेरा रोम रोम पुलकित है,मुनि बनने और संयम धारण करने के पश्चात इस विदर्भ भूमी पर विदिशा में चातुर्मास करने का यह मेरा पहला अवसर है”

 

उपरोक्त उदगार निर्यापक श्रमण मुनिश्री नियमसागर जी महाराज ने स्टेशन माधवगंज चौक पर विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुये व्यक्त किये उन्होंने कहा कि भगवान शीतलनाथ के माता पिता और परिवारजनों के वंशजों को देखकर मेरा रोम पुलकित है, कही यह मेरा सपना तो नहीं?कुछ कहने के लिये शब्द नहीं है।और समय भी कम है,प्रसाद के रुप में सभी वंशजों से में इतना कहना चाहता हूं कि भगवान शीतलनाथ का समवसरण बनाने के लिये बहुत बड़ा आशीर्वाद आप लोगों को आचार्य श्री ने दिया है,और यह समवसरण लगभग पूर्ण हो चुका है ऐसा मेंने आप लोगों से ही सुना है, मात्र शिखर रह गया है, भगवान शीतलनाथ तो आपके अपने भगवान है यही इसी धरती पर गर्भ में आए यही उनका जन्म हुआ,और यंही पर उन्होंने तप करके केवलज्ञान को प्राप्त किया।

आपके अपने भगवान के समवसरण में अब और ज्यादा समय नहीं लगना चाहिये। उन्होंने राग से वैराग्य की चर्चा करते हुये कहा कि जब भगवान ने दीक्षा ली होगी तो माता की आंखों में आंसू भी आए होंगे और वह आंसु की पवित्र बूंदें इसी धरती पर ही पड़ी होंगी, आप लोग तो उन्हीं भगवान शीतलनाथ के परिवारी जन हो, जो जन्म मरण करते करते पंचमकाल में पुनः इसी धरती पर जन्म लिया है।

 

उन्होंने कहा यह चातुर्मास का अवसर आपके पुण्य में वृद्धि कर, दर्शन चारित्र और ज्ञान में वृद्धि करने के लिये मिला है मेरा समस्त विदिशा वासियों को मंगल आशीर्वाद है। उन्होंने कहा कि भगवान के समवसरण में जाने के लिये तो बीस हजार सीढियों को चढ़कर जाना पड़ता था तब दर्शन मिलते थे आपके नगर का यह समवसरण तो मात्र दो किलोमीटर की दूरी पर है,उन्होंने कहा कि यह पंचमकाल है भगवान की भक्ती करने और गुरु का उपदेश सुनने के लिये स्वर्ग से कोई देवी देवता उतरकर नहीं आने वाले जो भव्य जीव होंगे वही अपना समय निकाल कर प्रभु और गुरु की आराधना कर चातुर्मास का लाभ उठा पाएगे।

 

 

 

यह चार माह आपको दर्शन ज्ञान और चारित्र में वृद्धि करने को मिले है आप सभी असंयम से संयम की ओर, मिथ्यात्व से सम्यकत्व की ओर तथा अज्ञान से ज्ञान की ओर बढ़े यही मेरा मंगल आशीर्वाद है।

 

श्री सकल दि. जैन समाज के प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया निर्यापक श्रमण वरिष्ठ मुनि श्री नियमसागर जी महाराज,मुनि श्री पवित्र सागर जी, मुनि श्री निरंजन सागर जी,मुनि श्री आदिसागर जी,क्षुल्लक संयम सागर जी सहित संघ का विदिशा नगर में आगमन हुआ। सकल दि. जैन समाज द्वारा की गयी संयोजना से नगर की महिलायें अपने मंडल के साथ तथा सभी युवा मंडल श्रद्धा के साथ उमड़ पड़े। प्रातः बासूपूज्य जिनालय से मुनिसंघ की शोभायात्रा घोड़ा बग्गी तथा विभिन्न महिलामंडलों के साथ महिला एवं विद्यासागर दिव्यघोष के साथ प्रारंभ हुई जो कि अहमदपुर चौराहा ओव्हरब्रिज से होकर खरीफाटक रोड़ से होते हुये श्री शांतिनाथ जिनालय स्टेशन जैन मंदिर पहुंची मार्ग में स्थान स्थान पर स्वागत द्वार एवं रांगोली से सजाये श्रद्धालु पादप्रक्षालन कर रहे थे वही हाथ में आरती की थाल थी चारों मुनिराजों की आरती कर अपने आपको
गौरावान्वित महसूस कर रहे थे। माधवगंज चौक पर धर्मसभा में आचार्य श्री के चित्र का अनावरण तथा दीप प्रज्जवलन के पश्चात श्रद्धालुओं को पाद प्रछालन एवं शास्त्रभेंट करने का सपरिवार सौभाग्य मिला एवं समाज द्वारा श्री फल अर्पित कर चातुर्मास का निवेदन किया गया एवं आचार्य गुरूदेव विद्यासागरजी महाराज, आचार्य समयसागर महाराज की अष्टद्रव्य से पूजा की गयी जिसमें विदिशा नगर की समस्त महिलामंडलों, सकल दि. जैन समाज,श्री शीतल विहार न्यास एवं सभी मंदिरों के पदाधिकारियों ने अर्घ समर्पित किये। मुनि श्री नियमसागर जी महाराज की आहारचर्या एवम चरण वंदना का सौभाग्य मुकेश जैन बड़ाघर परिवार को मिला।

19 जुलाई शुक्रवार को प्रातःकाल में मुनिसंघ नगर के जिनालयों की वंदना करने जाएगे एवं प्रवचन प्रातः8-15 से स्टेशन जैन मंदिर जी में होंगे तथा आहार चर्या भी यही संपन्न होगी।
संकलित जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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