निर्यापक श्रमण मुनि श्री सुधासागर महाराज ने श्री सुशील वैध के प्रति अपने भाव प्रकट किए साधु की सेवा का अवसर उन्हे मिल जाता तो सुशील वैध साधु का आभार मानते थे सुधा सागर महाराज
सागर
संत सेवा को समर्पित श्री सुशील वैध का आज निधन हो गया निश्चित रूप से यह एक अपूर्णीय क्षति है जिसकी रिक्तता को भर पाना मुश्किल है उनके प्रति निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव 108 सुधासागर महाराज ने कहा की वे वैध नहीं अपितु सम्पूर्ण भारत वर्ष के संतो के वैध थे और साधु की सेवा का अवसर उन्हे मिल जाता तो साधु का आभार मानते थे
महाराज श्री ने कहा जैन समाज मे इससे बड़ा वैध नहीं ऐसे वैध मिलना दुर्लभ है मुनियों के लिए वरदान थे इनके हाथ मे शुद्धि थी जिनके वचन मे शुद्धी थी जो पत्ती तोड़कर दे दे वही साधू के लिए औषधी बन जाती थी उनके यहाँ दवाई बन रही हो या दवाई की कुटाई हो रही हो 24 घंटे नमोकार भक्तामर चलता था कही लोग ऐसे कार्य कर जाते है जो मरने के बाद भी जीवित रहते है
एक रोचक जानकारी

वर्ष 2000 मे आचार्य श्री विद्यासागर महाराज सर्वोदय तीर्थ अमरकंटक मे थे उन्हे भयंकर व्याधि हर्पिस ने जकड लिया था अनेक उपचार किए गए तब अशोक पाटनी आर के मार्बल को पता लगा तुरंत चार्टर प्लेन को लेकर श्री सुशील वैध को लेकर गए तब उन्होने एक अस्पताल जेसा कर वही रहकर औषधि बनाई और गुरुदेव का इलाज किया निश्चित रूप से एक महान व्यक्तित्व थे
अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमंडी 9929747312
