आप में यदि योग्यता हैं तो किसी के सामने हाथ नही फैलाना चाहिए आचार्य श्री

धर्म

आप में यदि योग्यता हैं तो किसी के सामने हाथ नही फैलाना चाहिए आचार्य श्री

डोंगरगढ़
आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज ने चंद्रगिरी तीर्थ में अपने मंगल प्रवचन में कहा कि कौन सी वस्तु में इस समय मूल्य बढ़ता है, और बबली वस्तु का मूल्य घटता है। इसके विषय में ज्ञानी लोग हमेशा शास्त्रों के माध्यम से चिंतन करते रहते है।

 

 

उन्होंने कहा कि आपने यदि योग्यता है तो कभी भी किसी के सामने हाथ नहीं फैलाना चाहिए। अपने कार्य को स्वयं पुरुषार्थ कर करना चाहिए। हमेशा देने की सोचना चाहिए। तभी देने की आदत बनेगी। आप लोग हमेशा मांगते रहते हो यह अच्छी बात नहीं है।

एक बात को कहते हुए उन्होंने कहा कि कुछ बच्चे समूह बनाकर बांटते हैं क्योंकि उन्हें संस्कार ऐसे ही हैं। कुछ लोग भगवान के सामने रोते रहते हैं, ऐसा नहीं करना चाहिए और अपनी शक्ति अनुसार पुरुषार्थ करना चाहिए एवं अपने भावों को हमेशा स्वच्छ बनाए रखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कुछ भाव ऐसे करते हैं जिससे बहुमूल्य कर्मवीर भीतर ही भीतर घटिया खराब हो जाता है। रावण राम बन सकता था, दोनों की राशि एक थी। राम भारतीय संस्कृति के हैं। और रावण क्षेत्र में रहता हैं। दोनों की कर्मभूमि अलग-अलग है। यह राम का देश है यहां पुण्य बढ़ाने की प्रक्रिया आपके पास है। थोड़ा भाव बढ़ाओ देते आप लोग बोलियां बढ़ाते हो। पता नहीं चलता कहां से आवाज आ रही है और वह कोने में बैठा अपने भावों से बोलियां बढ़ाता रहता है। राम को देखकर रावण भी उनकी पूजा करने लगता है। अपनी अपनी भूमि में दोनों ही अपनी प्रजा को संबोधित करते हैं। राम की प्रसिद्धि आज भी विद्यमान है। और रावण दुर्भाव के लिए जाना जाता है।

उन्होंने एक उदाहरण के माध्यम से कहा कि दूध से घी बनकर तैयार हो गया और अब इसका मूल्य बढ़ गया इसकी सुगंधी चारों ओर फैल रही है और इससे भगवान की आरती होने लगी। जामन से कभी आरती नहीं होती है, जामन खट्टा होता है लेकिन व खुद अपने को खोकर दूध में ऐसे मिल जाता है कि वह दूध का सार घी सबके सामने लाकर रख देता है यह होती है जामुन की क्षमता घी सार है। दूध का और दूध का सार घी। यदि किसी घर में भी बन रहा है तो इसकी सुगंधी सारे मोहल्ले में फैल जाती है। लोग कहते हैं , देसी घी है विदेशी नहीं।

आचार्य गुरुदेव ने कहा कि भगवान से मांगने की आवश्यकता नहीं है, आप लोग जब देखो तब कुछ ना कुछ मानते ही रहते हो, बिन मांगे मोती मिले, मांगे मिले ना भीख। जब आपको अविनशवर्ता प्राप्त हो सकती है तो फिर क्यों मांगे।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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