सत्य बोलने में और सत्य धर्म में बहुत अंतर है-मुनिश्री सुधासागर महाराज
सागर /
मंगलगिरी में विराजमान निर्यापक श्रमण श्री सुधासागर महाराज ने कहा कि सत्य बोलने से किसी का व्यापार खत्म होता है, परिवार लड़ता है, सामने वाले की ज़िन्दगी बर्बाद है ।ऐसा सत्य भी पाप का बड़ा कारण है।सत्य बोलने वाले की भी दुर्गति है सत्य बोलने में और सत्य धर्म में बहुत अंतर है।।
उन्होंने कहा कि धर्म जिस आत्मा में हो सकता। उसे कोई मिटा नहीं सकता है धर्मात्मा को कोई अधमी बनकर ठग नहीं सकता है धर्म मेरे पास है या नहीं स्वयं फैसला आपको करना है अधर्म कभी जीत नहीं सकता।

आगम में लिखा है जहां हमारे सत्य बोलने पर विपदा आ सकती है। तब मौन हो जाओ। अहिंसा धर्म का पालन करने में झूठ भी बोलना पड़े तो भी वह मोक्ष का कारण बन सकता है। उन्होंने कहा कि बुराई बुराई को खींचती है और अच्छाई अच्छाई को खींचती है। साधु को साधु मिल जाए तो खुश हो जाता है, डाकू को डाकू मिल जाए तो वह खुश होता है लेकिन डाकू को साधु मिल जाए। तो वह खुश नहीं होता है। मुनिश्री ने कहा कि बुराई वाले को कभी अच्छाई पसंद नहीं आती। इसी प्रकार डाकू को कभी उजाला पसंद नहीं होता है।
धर्म के सामने वरदान टिकता नहीं है। होलिका दहन में होलिका जल गई और प्रहलाद बच गया क्योंकि प्रहलाद के पास धर्म था धर्म के कारण ही आज भारत पूरी तरीके से सुरक्षित है।
संकलित जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312
