विजयमती माताजी अवतरण दिवस

धर्म

विजयमती माताजी
कलिकाल में जैन दर्शन की श्रेष्ठतम ज्ञानबल धारी प्रथम गणिनी आर्यिका श्री विजयमती माताजी का अवतरणदिवस-

दीक्षा गुरु वात्सल्यरत्नाकर आचार्य श्री विमलसागर जी व दादा गुरु आचार्य श्री महावीरकीर्ति जी भगवन्त से शिक्षा को पाने वाली महान विदुषी साध्वी

तपस्वी सम्राट आचार्य श्री सन्मति सागर जी भगवन्त के प्रारंभिक साधना जीवन मे मुख्य प्रेरक रही

सत्य व शांति की खोज में निकले उड़ीसा के विलक्षण अति होनहार नवयुवा गंगाधर की शाश्वत तीर्थ सम्मेदशिखर जी मे वात्सल्यरत्नाकर स्वामी की आज्ञा पर पूज्या माताजी ने हजारो जिज्ञासाओ का सहजता से समाधान दिया,जिससे वही गंगाधर जो आज वर्तमान विश्व के महाज्ञानी,30 भाषाओं के ज्ञाता, 400 गहन साहित्यों के रचयिता,अनेकान्तवाद-उदारता-व्याकपता व निस्पृहता के पोषक पूज्यवर स्वाध्याय तपस्वी वैज्ञानिक धर्माचार्य श्री कनकनन्दी जी गुरूराज के रूप में जग विख्यात है,पूज्य गुरुदेव श्री कनकनन्दी जी समय के हर क्षण प्रथम गणिनी आर्यिका श्री विजयमती माताजी को अपनी प्रथम ज्ञानदात्री गुरु के रूप में गौरव पूर्वक स्मरण व बखान करते है।
पूज्या माताजी ने समस्त प्राचीन जैन ग्रंथो का अध्ययन कर अनेक साहित्यों की रचना की,साथ ही दक्षिणभारत में ऐतिहासिक तीर्थो की भी खोज की,आप वर्तमान की तीनों श्रमण परम्पराओ में से प्रथम गणिनी आर्यिका पद पर अलंकृत हुई।

अपने गुरुओ के गौरव के प्रति अटूट श्रद्धावान समाधिस्थ गणिनी आर्यिका श्री विजयमती माताजी के अवतरणदिवस पर कोटिशः वन्दन

शब्दसुमन-शाह मधोक जैन चितरी

नमनकर्ता-श्री राष्ट्रीय जैन मित्र मंच भारत

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