35 वर्षों से गुरुओं के आशीर्वाद से हम इस पद पर हैं आचार्य श्री वर्धमान सागर जी।
बांसवाड़ा। 
- आज 35 वा वर्षायोग है 35 में 3 और 5 का अंक का योग 8 होता है 8 का अंक 8 कर्मों का सूचक है सांसारिक प्राणी 8 कर्मों के संचय के कारण दुखी है विषय और कषाय महान शत्रु है आचार्य शांति यह सागर जी ने मोक्ष का मार्ग बतलाया सड़क पर नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे होते हैं उसी प्रकार नेशनल हाईवे महाव्रत और स्टेट हाई वे अणुव्रत हैं जो मोक्ष का मार्ग बताते हैं। अपने वास्तविक मोक्ष घर के सुख के लिए बहुत त्याग कर पुरुषार्थ करके जीवन में परिवर्तन लाना होता है यह मंगल देशना पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने 35 में आचार्य पदारोहण के अवसर में आयोजित धर्म सभा में प्रकट की। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने आगे बताया कि आज प्रतिमा घारी ब्रह्मचारी प्रदीप भैया ने दीक्षा लेने के लिए याचना कर श्रीफल भेंट किया है। दीक्षा संसार की हननी है तीर्थंकर और आचार्य परमेष्ठी ने धर्म को प्रतिपादित किया है पंच परमेष्ठी में अरिहंत सिद्ध भगवान के बाद आचार्य परमेष्ठी मध्य में आते हैं उनके बाद उपाध्याय और साधु परमेष्ठी होते हैं आचार्य परमेष्ठी अरिहंत और सिद्ध भगवान की दिव्य देशना को उपाध्याय और साधु परमेष्ठी के और समाज को देकर मार्गदर्शक और पद प्रदर्शक होते हैं।

धर्म शासन जीने की कला और परिभाषा बताता है आप स्वयं अपने जीवन का मूल्यांकन करें कि आप कहां खड़े हैं ,धर्मशासन से व्यक्ति जीवन को महान बना सकता है अपना कर परमात्मा पद का सकता है अभी आदिनाथ भगवान से लेकर महावीर स्वामी का शासन चल
रहा है तीर्थंकर भगवान ने धर्म का प्रवर्तन किया धर्म चरित्र को अपना कर धर्म की अलख जगाई। महानतम साधु चरित्र को जीवन में अपना कर सफलता प्राप्त करते हैं । यह मंगल देखना आचार्य श्री वर्तमान सागर जी महाराज ने धर्म सभा में प्रकट की समाज अध्यक्ष महेंद्र बोरा, कमल सागरीय समाज प्रवक्ता महेंद्र कवलिया ने बताया कि आचार्य शांति सागर जी ने मुनि मार्ग को पुनर्जीवित किया 20वी सदी के बाद में 21वीं सदी आती है इसलिए 20वीं सदी को नहीं भूलना चाहिए ।20 वी सदी मे आचार्य शांति सागर जी महाराज ने हमें धर्म और मुनि मार्ग को बतलाया हम क्या हैं हमारा क्या लक्ष्य है इसका चिंतन करना बहुत जरूरी है जिनालय जहां भगवान विराजित होते हैं उसके संरक्षण के लिए आचार्य शांति सागर जी ने 1105 दिनों तक अन्न आहार का त्याग किया था ।मात्र ईंट और पत्थर के जिनालय नहीं होते उसमें दर्शन अभिषेक पूजन स्वाध्याय कर जीवन को उन्नत बना सकते हैं जीवन की सार्थकता भगवान के दर्शन पूजन स्वाध्याय से है तप के साधन करना चाहिए आचार्य शांति सागर जी को आचार्य पद के 100 वर्ष हो चुके हैं समाज को उपकारों का ऋण चुकाना चाहिए आचार्य ज्ञान रूपी दीपक से प्रकाश और राह दिखाते हैं। आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की परंपरा के आचार्य धर्मसागर जी महाराज से1969 में दीक्षित आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज को 24 जून 1990 आषाढ़ सुदी दूज को आचार्य पद दिया गया ।74 वर्षीय आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का 35 वा आचार्य पदारौहण श्रवण बेलगोला के नवोदय भटारक चारुकीर्ति जी स्वामी सहित समस्त भारत देश विभिन्न प्रांतो से पधारे हजारों भक्तों की महती उपस्थिति में भक्ति और उत्साह से मनाया गया। राजेश पंचोलिया इंदौर अनुसार प्रातः काल 5:00 बजे से भक्ति आचार्य श्री के दर्शन संपूर्ण संघ ने आचार्य श्री की परिक्रमा लगाकर भक्ति कर चरण वंदना की ।मंदिर से गौशाला परिसर के लिए संघ का आगमन हुआ ।सर्वप्रथम झंडा वंदन अशोक वोरा सागवाड़ा द्वारा किया गया। धर्म सभा में आचार्य शांतिसागर जी एवं पूर्व आचार्य के चित्र का अनावरण अतिथियों द्वारा किया गया आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन का सौभाग्य जयपुर के अग्रवाल परिवार को प्राप्त हुआ ।जिनवाणी राजकुमार सेठी जयपुर को प्राप्त हुआ
विनयांजलि सभा में श्रावक पंडित हंसमुख,राकेश सेठी,अनिल सेठी बेंगलोर,अशोक वोरा,मणि कारवां, राजेंद्र कटारिया सुरेश मारौरा ने आर्यिका श्री सम्मेद शिखर मति,सौरभ मति,आ श्री शुभ मति मुनि श्री मुमुक्षु सागर ने भावांजली दी आहार चर्या के बाद दोपहर के सत्र में पक्षी विराम स्थल का शिलान्यास हुआ.
आर्यिका श्री दिव्ययश मति माताजी ने आचार्य श्री के 36 मुलगुण बताए। 12तप10 घरम स्वाध्याय आदि 36 गुण बताए। आ श्री महायश मति ने बताया कि हमने तीर्थंकर कुल जैन कुल के साथ उस कूल में मेरा जन्म हुआ जिस कूल में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का जन्म हुआ पंचोलिया परिवार में और आचार्य श्री ने मेरे दादाजी
को भी मुनि श्री चारित्र सागर जी को भी दीक्षा दीआ विनम्रवती आ पूर्णिमा मति आ वत्सलमति जी ,मुनि श्री हितेंद्र सागर जी मुनि श्री पुण्य सागर ने अपने गुरु के प्रति विनयांजलि दी नवीन पीछी श्री पुण्य सागर जी महाराज संघ की ओर से वीणा दीदी ने और संजय पापड़ीवाल के साथ अनेक लोगो ने नवीन पीछी आचार्य श्री को भेंट की आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने इस अवसर पर बताया कि आज 35 वर्षों से हम इस पद पर हैं तो उसके लिए सन 1968 ग्रहस्थ अवस्था से लेकर वर्तमान तक हमें आ श्री सुपार्श्वमति आ श्री ज्ञानमती ,आचार्य विमल सागर जी, आचार्य शिवसागर जी, आचार्य कल्प श्री श्रुत सागर जी, आचार्य धर्मसागर जी ,आचार्य अजीत सागर जी सहित अनेक साधुओं का हमें संबल मिला हमें सहारा
मिला और उनसे हमने ज्ञान प्राप्त किया और हमारे वैराग्य के कारण भी माताजी है आज हम जो कुछ है वह पूर्व आचायौ के आशीर्वाद से हैं। इस अवसर पर नवीन भट्टारक चारुकीर्ति जी श्री क्षेत्र श्रवण बेलगोला का सकल जैन समाज द्वारा हार्दिक अभिनंदन किया गया। आचार्य श्री की पुरानी लेने का सौभाग्य संजय पापड़ीवाल किशनगढ़ को प्राप्त हुई 35 परिवारो को जिनवाणी भेंट का सौभाग्य मिला
राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

