भक्तो के पुण्य से ही भगवान की वाणी खिरती है स्वस्तिभूषण माताजी

धर्म

भक्तो के पुण्य से ही भगवान की वाणी खिरती है स्वस्तिभूषण माताजी
केशवरायपाटन
परम पूजनीय भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105 स्वस्तिभूषण माताजी सानिध्य में अतिशय क्षेत्र पर धर्म प्रभावना हो रही है। एवं विगत दिनों से यहां पर कल्पदुम महामंडल विधान का आयोजन हो रहा है।

 

 

 

 

रविवार की बेला में माताजी ने अपने प्रवचन में संध्या बेला जब दिन डूबने को होता है रात आने वाली होती है या गौधूली बेला जब गाय जंगल से चरकर शाम को घर वापिस आ रही होती है उसे कहते हैं गौधूली बेला! जब गाय आती हैं तो धूली उड़ती है इसलिए कहते हैं गौधूलि बेला या संध्या काल! संध्याकाल मतलब टरनिंग पॉइंट! समवशरण में भगवान की वाणी संध्या काल में अपने आप खिरती है!

 

 

 

उसमें किसी मुख्य श्रोता की आवश्यकता नहीं होती कोई प्रश्न पूंछे या ना पूछें दिव्य ध्वनि तो खिरती ही है! तो क्या अन्य समय में नहीं खिरती? यदि मुख्य श्रोता आ जाए जैसे चक्रवर्ती या कोई पुण्य पुरुष आदि पुण्यशाली जीव आ जाएँ और वह प्रभु से प्रश्न करे तो ध्वनि खिर जाती है! राजा श्रेणिक भगवान महावीर के समवशरण में जब

 

 

 

भी प्रश्न करते थे भगवान की वाणी खिर जाती थी! भक्तों के पुण्य से ही भगवान की वाणी खिरती है! राजा श्रेणिक ने भगवान महावीर स्वामी के समवसरण में 60 हजार प्रश्न किये! भगवान की वाणी ओमकारमयी होती है! गणधर उस ओमकारमयी वाणी से प्रश्न कर्ता का उत्तर निकाल लेते है! वहाँ पर जो देव गण होते हैं वह 700 लघु भाषा 18 महा भाषा इतने रूप में परिवर्तित करके जितने भी जीव वहाँ पर बैठे होते हैं उनके कान तक पहुंचा देते हैं! ऐसी होती है भगवान की वाणी! आज हम भगवान की वाणी को ग्रंथो से पढकर या साधु संतो के माध्यम से सुन रहे हैं! जिस दिन हम साक्षात

 

 

 

भगवान की वाणी सुनेगे उस कितना आनंद होगा! निश्चित रूप से बड़ा पुण्य चाहिए वहाँ बैठने के लिए! लेकिन यह तय है आज यहाँ जो लोग भी बैठे हैं वह निश्चित ही सम्यक दृष्टि जीव हैं और आने वाले भवों में जरूर ऐसा सौभाग्य प्राप्त करेंगे!

 

 

 

चेतन जैन केशवरायपाटन से प्राप्त जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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