सम्यक दर्शन के बिना सारी धर्म क्रियाएं केवल प्रदर्शन मात्र है अजित सागर महाराज
बागीदौरा
आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज की परम शिष्य मुनि श्री अजीत सागर महाराज ने आचार्य विद्यासागर संत भवन में धर्म सभा में गुरु और धर्म की निकटता का महत्व बताया उन्होंने कहा कि परमात्मा, देव,गुरु और धर्म के प्रति अटूट श्रद्धा का होना ही सम्यक दर्शन है।
महाराज श्री ने इसका भावार्थ समझते हुए बताया कि सम्यक दर्शन का अर्थ है सच्चे धर्म पर सच्ची श्रद्धा। सम्यक दर्शन की साधना करते हुए वह भली बाती जान लेता है कि संसार
असार है, संसार से अलिप्त होकर संयम जीवन को धारण करना ही इस मानव जीवन का सार है। संसार की असारता का भान होना और साधु जीवन धारण करने की प्रतीति होना सम्यक दर्शन है। सम्यक दर्शन के बिना सारी धर्म क्रियाए केवल प्रदर्शन मात्र हैं। जिसे जिनवाणी श्रवण करने में आनंद आता हो, जिसकी जिनवाणी में सच्ची श्रद्धा हो वही जीव सम्यक दृष्टा है।

धर्म सभा में ऐलक श्री विवेकानंद सागर महाराज ने कहा कि नल के पानी और टीवी की वाणी से दूर रहना एवं कुएं के पानी और गुरु की वाणी की निकट रहने से अच्छी गुणों का विकास होता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
