क्षपक 61 वर्षीय आचार्य श्री विरागसागर जी का जीवन परिचय
आपका जन्म 2 मई 1963 पथरिया जिला दमोह में श्रेष्ठि श्री कपूर चंद जी (समाधिस्थ मुनि श्री विश्व वंद्य सागर जी) एवं माता श्रीमती श्यामा देवी( समाधिस्थ आर्यिका श्री विशांत मति) के यहां पथरिया जिला दमोह में हुआ आपका बचपन का नाम श्री अरविंद कुमार जैन था ।आपने 5 तक की शिक्षा पथरिया में प्राप्त करने के बाद सन 1974 में कटनी श्री शांति सागर निकेतन संस्कृत विद्यालय में धार्मिक शिक्षण 6 वर्ष प्राप्त कर 11 तक की लौकिक शिक्षा तथा शास्त्री की परीक्षा उत्तीर्ण की आपने 20 फरवरी 1980 को 17 वर्ष की उम्र में बुढ़ार में आचार्य श्री सन्मति सागर जी से क्षुल्लक दीक्षा ली आपका नाम श्री पूर्ण सागर किया गया आपने 9 दिसंबर 1983 को औरंगाबाद में मुनि दीक्षा आचार्य श्री विमल सागर जी से प्राप्त की आपका नाम श्री विराग सागर जी किया गया आपको आचार्य पद 9 नवंबर 1992 को 29 वर्ष की उम्र में सिद्ध क्षेत्र द्रोणगिरी में दिया गया
विशेष संयोग
आपके जीवन में व V का बहुत अद्भुत संयोग रहा आपके दीक्षा गुरु आचार्य श्री विमल सागर जी, आप आचार्य श्री विराग सागर जी आपके सभी दीक्षित शिष्यों के नाम भी व V से प्रारंभ होते है श्रमण परम्परा का यह एक कीर्तिमान हैं कि किसी दीक्षाआचार्य ओर उनके शिष्यों के नाम का प्रथम अक्षर एक समान हो।
आपके द्वारा 300 से अधिक अनेक दीक्षाएं दी गई है। कुछ वर्षों पूर्व की जानकारी अनुसार 9 आचार्य 89 मुनि दीक्षा,4 गणनी ,आर्यिका 71दीक्षा, एलक 5 दीक्षा 23 क्षुल्लक तथा 29 क्षुल्लिका दीक्षा सहित 230 दीक्षा दी गई। आपके प्रमुख शिष्यों में आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी ,आचार्य विमद सागर जी ,आचार्य विभव सागर जी आचार्य श्री विन्रम सागर जी आचार्य श्री विनर्स सागर जी आचार्य श्री विमर्श सागर जी आदि बनाए गए हैं आपके द्वारा अनेक साहित्य का सृजन किया गया है अनेकों समाधियां कराई हैं
अनेक सिद्ध अतिशय क्षेत्रों मंदिरों ,जिनालयों का मरम्मत नवीनीकरण प्रेरणा देकर कराया

आपने 44 वर्ष के संयमी जीवन में 44 वर्षायोग किए जिनमे सर्वाधिक भिंड में 7 ,श्रेयांस गिरी में 5 , सिद्ध क्षेत्र शिखर जी में 2 ,द्रोण गिरी में 1 अतिशय क्षेत्र में एक महानगरों ने 3 तथा जन्म भूमि में 2 वर्ष सन 2015 ,2022 ने चातुर्मास किए।
संयम काल में 3 करोड़ 80 लाख जप किए हैं।
आपके पिता ने पहले क्षुल्लक फिर मुनि दीक्षा लेकर, तथा जन्म दाता माता ने आर्यिका दीक्षा लेकर समाधिमरण किया।
गृहस्थ अवस्था में 3 अनुज श्री विजय,श्री सुरेंद्र ओर ब्रह्मचारी नरेंद्र हैं तथा श्रीमती मीना और श्रीमती विमला बहने हैं
श्री संजीव जैन भिंड से प्राप्त जानकारी अनुसार
राजेश पंचोलिया इंदौर
