साधना के सतत प्रहरी थे आचार्य विरागसागर

धर्म

साधना के सतत प्रहरी थे आचार्य विरागसागर
परम पूजनीय महासंत आचार्य श्री 108 विरागसागर महाराज ऐसे संत हुए जिन्होंने अनेक युवाओं को दीक्षा देकर धर्म मार्ग पर आरूढ़ कर मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर किया

 

 

 

यू कहे तो लगभग 350 से अधिक दीक्षा इनके द्वारा प्रदान की गई। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान जैसे कार्य प्रेरणा दी इन्ही की प्रेरणा से पथरिया के नजदीक विरागोदय तीर्थ निर्मित हुआ है जो जैन धर्म की ध्वजा को पुलकित कर रहा है। आपके द्वारायुग प्रतिक्रमण की शुरुआत की गई।

 

 

 

 

 

जो एक नया इतिहास बना गई। निश्चित रूप से संत जगत ने एवं जन जन विगत 4 से 5माह के अंतराल में दो महान संतों का वियोग सहा है। ऐसे महा संत के चरणों में कोटि-कोटि नमन

मानव मात्र के लिए एक प्रेरक संत थे जैन समाज को एक और गहरा आघात है जिसकी पूर्ति कर पाना संभव नहीं है
आज 4 जुलाई 2024 को प्रातः 3:00 के आसपास जालना (महाराष्ट्र)
शहर के नजदीक देवमूर्ति ग्राम, सिंदखेड़ राजा रोड पर हुई।

अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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