भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105 विज्ञाश्री माताजी ससंघ के पावन सानिध्य में श्री दिगम्बर जैन मंदिर बगरूवालन जयपुर में चल रहे पंचकल्याणक महोत्सव में आज तप कल्याणक की क्रियाएं हुई
वैराग्य उत्पन्न होने पर राज ,पाट, धन ,वैभव और विषय कषायों को छोड़कर दीक्षा धारण करने के काल को तप कल्याणक कहते हैं
आर्यिका विज्ञा श्री
जयपुर/
भारत गौरव गणिनी आर्यिका रत्न 105 विज्ञा श्री माताजी के पावन सानिध्य में चल रहे भव्य पंचकल्याणक महोत्सव में आज तप कल्याणक की क्रियाएं पूरी हुई जैन समाज के मीडिया प्रवक्ता राजाबाबू गोधा ने अवगत कराया कि इसमें पूर्व जिनालय में प्रातः श्री जी का अभिषेक, शांतिधारा ,एवं अष्टद्रव्यों से पूजा के बाद गुरु मां ने अपने मंगलमय मय प्रवचन में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि नेचर बदलने का नाम तप कल्याण है
परम पूज्य गणिनी आर्यिका गुरु माँ विज्ञाश्री माता जी के सानिध्य में चल वनीपार्क जयपुर में रहे पंचकल्याणक के अंतर्गत आज प्रातः काल 9:00 बजे बालाचार्य निपूर्ण नंदी जी महाराज संसघ का भव्यता पूर्वक मंगल आगमन हुआ एवं भगवान का वैराग्य में दृश्य और दीक्षा का कार्यक्रम की झलकियां दिखाई गई गुरु माँ ने दीक्षा का एवं तप कल्याणक का महत्व बताते हुए कहा कि वैराग होने पर राजपाट, धन वैभव और विषय कषायो को छोड़कर दीक्षा धारण करने के काल को तपकल्याण कहते हैं ।तफकल्याणक का दूसरा नाम निष्क्रमण भी है, गुरु माँ ने दीक्षा का अर्थ बताते हुए कहा कि h को सुधारे अर्थात head हेड मतलब सिर,hand हैंड मतलब हाथ,heard हॉट मतलब ह्रदय ,Heevit हेविट मतलब आदत 1. हेड मस्तक में विचार सकारात्मक ,2.हैंड हाथों अर्थात ईमानदारी की कमाई हो ,हॉट हृदय में दया प्रेम हो ,हैबिट बुरी आदतों को सुधारना इसी का नाम दीक्षा है ,इस प्रकार गुरु मां ने तप कल्याणक का महत्व बतालाते हुए कहा कि हमारे जीवन में भी तप आए और हमारा जीवन भी सफल हो। कार्यक्रम बाद आर्यिका श्री ने सभी भक्तजनों को मंगलमय आशीर्वाद दिया है।
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राजाबाबू गोधा जैन महासभा मीडिया प्रवक्ता राजस्थान
