आचार्य विद्यासागर ने मुझे णमोकार मंत्र सिखाए मुनि श्री योग सागर महाराज
कुंडलपुर
परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 योग सागर महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि आज पावन पर्व है, पर्व का अर्थ होता है महोत्सव कौन सा महोत्सव है न तो जन्मोत्सव है न दीक्षा महोत्सव है, आज तो मृत्यु महोत्सव है। जिन्होंने मृत्यु महोत्सव का अनुभव किया उन्होंने अपने जीवन में जिनवाणी की आराधना करते-करते जिस चीज की उपलब्धि की जिन्होंने अपने जीवन को पूरा का पूरा लगाया और अंत में ऐसे महान आचार्य श्री ज्ञान सागर महाराज का दर्शन करने का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ था।
उन्होंने बताया कि आज से सन 1968 1969 2 साल लगातार दो माह तीन माह तक उनके चरण वंदन करने का रज लगाने का
सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ। उसे वक्त में बालक जैसा था 10, 12 वर्ष का था धर्म के बारे में जानता न था उनके वचन सुनता रहा। आचार्य विद्यासागर ने मुझे णमोकार मंत्र सिखाया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
