टर्निंग प्वाइंट स्वस्ति भूषण माताजी

धर्म

टर्निंग प्वाइंट स्वस्ति भूषण माताजी
तेजी से जाती हुई गाड़ी, सामने मोड़ के दिखते ही धीमी हो जाती है ड्राइवर सावधान हो जाता है। सड़क मोड़ ले रही है सावधान नहीं रहे तो एक्सीडेंट की संभावना है। इसी तरह हमारे जीवन में भी बहुत सारे मोड़ आते हैं उन मोड़ों पर सावधान होना उतना ही आवश्यक है जितना सड़क के मोड पर होते हो।

 

 

बच्चा जब 8 वर्ष का होता है तब परिवार वाले कहने लगते हैं अब समझदार हो गया, दुनिया को थोड़ा-थोड़ा जानने लगा। दूसरा मोड 14 से 16 वर्ष के बीच आता है। इस समय यदि बच्चे को खराब संगति मिल जाए तो बच्चा गलत रास्ते की तरफ चला जाता है। और अच्छी संगति मिल जाए तो साधु संत भी बन सकता है। इस उम्र में संगति का ध्यान रखना आवश्यक होता है। तीसरा मोड़ आता है 21 से 24 के बीच जब शादी होती है। इसका आशय है कि एक से दो होने का कार्यक्रम प्रारंभ होता है। तब भी सावधान होना आवश्यक है। 1 से 2 होने पर प्रेम भी हो सकता है और लड़ाई भी हो सकती है। इसका आशय यहां भी जीवन साथी रूपी ड्राइवर को सावधान होना आवश्यक है। सावधान रहा, तो गाड़ी बढ़ जाएगी वरना एक्सीडेंट हो सकता है। कुछ भी हो सकता है। जीवन में फिर चौथा मोड़ आता है जब दो से तीन होते हैं। इसका आशय एक नया मेहमान उस घर में प्रवेश करता है। मेहमान तो जीवन से अनभिज्ञ रहता है पर माता-पिता सावधान रहते हैं। बच्चा प्रेम की निशानी है किंतु इस मोड़ पर सावधान नहीं रहे तो वही लड़ाई का कारण बन जाएगा इसका आशय है कि इस मोड़ पर भी सावधान होना आवश्यक है।

 

 

जीवन में पांचवा मोड़ आता है जब बच्चे बड़े हो जाते हैं और माता-पिता छोटे हो जाते हैं। बच्चा माता-पिता को बोलना सिखाने लगता है। हर बात में समझाने लगता है। तब इस मोड़ पर गुस्सा तो बहुत आता है पर सावधानी से सहन करना पड़ता है। तभी गाड़ी आगे रास्ते पर जाएगी वरना मोड पर ही रुक जाएगी। धीरे-धीरे बच्चा बड़ा हुआ। शादी की व्यवस्था प्रारंभ की तब छठवा मोड़ आता है जीवन का, बहु घर में आने वाली है। परिवार में एक सदस्या और शामिल हो गई। वहां दो अलग-अलग उम्र वालों को अर्थात सास बहू को एक साथ रहना है। यहां भी गाड़ी के ड्राइवर को सावधान रहना होगा। खतरनाक मोड़ जरा सी असावधानी से एक्सीडेंट होने की संभावना है। नया पुराने के साथ कैसे सेटिंग उठा सकते हैं इस बात का ज्ञान दोनों को होना आवश्यक है। मोड पर जब दो गाड़ियां निकलती हैं तब कितना ध्यान रखते हैं ठीक ऐसे ही इस मोड़ पर सावधान होना आवश्यक है।

अंतिम मोड़ आया जीवन का जब शरीर में बुढ़ापा घंटी मारने लगता है, बुढ़ापे में कमजोरी और बीमारियां घेरने लगती है। पहले जितना काम नहीं कर पाते, पहले जितनी दौड़ भाग नहीं कर पाते। ना काम किया जाता है, ना भगवान का नाम लिया जाता है। भगवान से स्वस्थ होने के अलावा दूसरी प्रार्थना नहीं रह जाती है। इस मोड़ पर चिंताएं घेर लेती हैं। क्योंकि जिंदगी में चिंता करने के संस्कार बहुत पड़े हैं इसके अलावा कुछ आता नहीं। जिसने अपने जीवन में ज्ञान की ज्योति जलाई है और हर मोड़ पर सावधान का जीवन जिया है, वह इस मोड़ पर भी सावधान रहेगा। और हर मोड़ पर जो सावधान है वह सबसे बड़ा पहलवान है।

दो अलग-अलग मिले हुए रास्ते को मोड कहते हैं। इसे संधि भी कहते हैं जहां पर जहां न इस पार है ना उस पार है जैसे नींद में जा रहे हैं ना पूरे जागे हैं, ना पूरे सोए हैं। जैसे दिन जा रहा है, रात्रि आ रही है। दिन पूरा गया नहीं रात्रि पूरी आई नहीं इसे संधिकाल कहते हैं। आपने बुजुर्गों से सुना होगा कि शाम के समय सोते नहीं है। इस समय सोओगे तो बीमार हो जाओगे शाम की बेला में झाड़ू भी नहीं लगाने देते शाम होते ही कहते हैं लाइट जला दो शाम हो गई इस समय अंधेरा नहीं होना चाहिए भगवान की आरती का सही समय भी यही माना जाता है। लोग कहते हैं, शाम हो गई बत्ती कर दो। टर्निंग पॉइंट है तो महत्वपूर्ण। भगवान की दिव्य ध्वनि तीनों संधि काल में ही खिरती है संधि काल में सामयिक का भी आदेश किया है।

बहुत सारी संधि देखी, एक और संधि पर ध्यान दें। भावो की संधि आशय भाव परिवर्तन। जैसे आप शांति से कोई काम कर रहे है और किसी ने आपसे कुछ ऐसी बात कही कि आपको गुस्सा आ गया। अब आप शांति की स्थिति से गुस्से की स्थिति में प्रवेश कर रहे है। ये भी संधि भाव है, वहा भी सावधान होना आवश्यक है। गुस्सा का मोड आने के पहले मन की गाड़ी को भी धीमी कर लो और सावधानी से चिंतन मनन करके गाड़ी को आगे निकाल लो। यदि इस मोड़ पर सावधान नहीं रहे तो जैसे दो गाड़ी तेज से टकराए तो चोट बहुत लगती है ठीक ऐसे ही सावधानी ना होने पर वाणी के द्वारा दोनों की गाड़ी चोट अवश्य खाएगी। अतः है क्या बोलना कितना बोलना और पूर्व के समय में उनके द्वारा किए कार्यों को ध्यान रखके आगे बोलो तो गाड़ी का एक्सीडेंट होने से बच जाएगा। इसलिए क्रोध भी करो तो सावधानी के साथ।

एक मोड़ आप तब लेते हो, जब जब संसार से निकल कर धर्म में प्रवेश किया भावो से सावधान हो जाओ, अब धर्म के अलावा ना कुछ सोचना है ना कुछ करना है। दर्शन कियें, माला फेरने के लिए, माला हाथ में उठा ली। हाथ की माला के साथ मन की माला भी प्रारंभ, बाहर के विचारों को छोड़े इसका आशय इस मोड़ पर सावधान रहना आवश्यक है।

 

और जिंदगी में हर पल सावधान रहना आवश्यक है जैसे हर जगह एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के संस्कार हैं वैसे ही भाव में अपनी आत्मा में आने के संस्कार होने चाहिए। जैसे सारी दुनिया घूमते हो पर कुछ समय बाद ही अपने घर की याद आने लगती है, वैसे ही संसार के कार्य करने के बाद आत्मा रूपी घर में वापस आने की याद आनी चाहिए। तभी आपको शांति का अनुभव हो पाएगा। जब आत्मा रूपी घर में जाओगे तब मोड पर मोड मिलेंगे, क्रोध मान माया लोभ पाप मिलेगा राग बुलाएगा, द्वेष आवाज देगा। पर टाइम होने पर आप किसी की मत सुनना आत्मा रूपी घर में आकर शांति से बैठ जाना।

मोड क्या है एक शक्ति है, एक ऊर्जा है। जैसे ही शाम है इसमें दिन के परमाणु हैं और रात के परमाणु भी हैं दो चीज जब टकराती है तो शक्ति उत्पन्न होती है। उस केंद्र को समझकर उसका उपयोग करो। दो पत्थर टकराते हैं तो अग्नि उत्पन्न होती है। आपके घर में लाइटर के अंदर दो पत्थर है, जब टकराते हैं तो घर की गैस चालू हो जाती है। ऐसी ही उस समय हम आत्मज्ञान की ज्योति जलाना चाहे तो जला सकते हैं आपने देखा होगा कि जब दो मौसम मिलते हैं हवा में कितने जीवन की उत्पत्ति होती है। बरसात में जब पूरी बारिश हो तब जीव नहीं होंगे, जब धूप निकलेगी तब होते हैं। फरवरी मार्च सर्दी जा रही है गर्मी आ रही है, तब भी जीव होते हैं। इसका आशय है मोड जीवन का महत्वपूर्ण समय है इसका उपयोग आपको अनंत सुखों से भर सकता है। केवल सावधान रहने की आवश्यकता है।

स्वस्ति भूषण माताजी द्वारा लिखित पुस्तक टर्निंग प्वाइंट से आलेखित लेख
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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