आचार्य भगवन ने जो परिकल्पना की वह परिकल्पना साकार हुई निष्पक्ष सागर महाराज कुंडलपुर तीर्थ के मुनिसुव्रतनाथ जिनालय में कलशारोहण हुआ

धर्म

आचार्य भगवन ने जो परिकल्पना की वह परिकल्पना साकार हुई निष्पक्ष सागर महाराज कुंडलपुर तीर्थ के मुनिसुव्रतनाथ जिनालय में कलशारोहण हुआ
कुंडलपुर
पावन सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर बड़े बाबा जिनालय एवं सहस्त्रकूट जिनालय पर कलशारोहण स्थापना के बाद छह धारिया स्थित नवनिर्मित मुनिसुव्रतनाथ जिनालय में प्रतिमा स्थापना के साथ कलशारोहण स्थापित किया गया।


यह कलशारोहण कुंडलपुर तीर्थ क्षेत्र कमेटी के पूर्व अध्यक्ष संतोष सिंघई, रेशु सिंघई परिवार द्वारा किया गया। इन मांगलिक पलों में आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज एवं आचार्य गुरुवर समय सागर महाराज का पूजन किया गया। 

इस अवसर पर पूज्य मुनिश्री 108 निष्पक्ष सागर महाराज ने अपने मंगल उद्बोधन के द्वारा बताया कि आज हम सभी कलशारोहण कार्यक्रम के बाद उपसंहार के रूप में उपस्थित हुए हैं। बड़े बाबा का बड़ा कलशारोहण बड़े विशाल संघ के संसघ सानिध्य में युग श्रेष्ठ आचार्य श्री 108 समय सागर महाराज के संसघ सानिध्य में पूर्णता को प्राप्त हुआ। इस अभूतपूर्व अवसर पर हम सब देश की सारी जनता बड़े बाबा के और ठीक बड़े बाबा के सामने वह अद्वितीय जिनालय जिसमें 1008 जिनबिम्ब तीन दिनों में वेदी पर प्रतिष्ठित हुए।

 

 

 

 

एक विश्व महामहोत्सव में सभी ने अद्भुत अद्वितीय आनंद की अनुभूति की। आचार्य भगवन ने जो परिकल्पना की थी वह परिकल्पना साकार हुई। आचार्य भगवन की सोच आचार्य भगवन के विचार व आचार्य भगवन की यह कृति युगों युगों तक जैनत्व की गौरव गाथा गाएगी। एक एक जिनबिम्ब में ऐसा आनंद आ रहा था अमरकंटक में दर्शन किए होंगे।

 

 

 

गुरु के प्रति भाव प्रकट करते हुए महाराज श्री ने कहा कि अपने जीवन में गुरु की कृपा से एक साथ 1008 जिनबिम्ब के दर्शन किए एक अनुभूति हो रही थी, ऐसा आनंद आ रहा था आज जब मैं वहां दर्शन करने गया आज एक-एक वेदी पर जिनबिम्ब स्थापित हो चुका है।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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