मन का झरना शुद्ध है, तो जीवन के तालाब में कभी कीचड़ जमा नही होता। आदित्य सागर महाराज
केकड़ी
परम पूज्य मुनि श्री आदित्य सागर महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि आकाश से बरसने वाला पानी किसी व्यक्ति विशेष का नहीं होता। वह उच्च नीच सभी स्थलों पर समभाव के साथ बरसता है, ठीक इसी प्रकार वीतराग वाणी भी किसी व्यक्ति विशेष का या संप्रदाय विशेष से आबद्ध नही है, वरन सभी के लिए है। प्रभु की वाणी का वर्षण सभी के लिए समान रूप से होता है। ग्रहण करने वाले की भिन्नता के कारण प्रभु वाणी की परिणीति में भिन्नता आती है। मेघ के पानी में जो स्वच्छता वह निर्मलता होती है, उससे भी विलक्षण प्रकार की स्वच्छता व निर्मलता वीतराग वाणी में होती है।
महाराज श्री ने आगे कहा कि बरसात का पानी सभी के लिए समान रूप से बरसता है। उस पानी में किसी के प्रति भेदभाव की मलीनता नहीं होती है। इस प्रकार जिनवाणी भी सभी के लिए समान रूप से बरसती है। भगवान महावीर की वीतराग वाणी जनकल्याण के साथ-साथ सभी को तारने वाली, संसार सागर के दलदल से उबारने वाली, राग द्वेष को मिटाने वाली, आत्मा के भगवान को प्रकट कराने वाली तथा मोक्ष के सभी सुखों को प्रदान करने वाली है।

महाराज श्री ने आगे कहा कि उपकारी के उपकार को कभी नहीं भूलना चाहिए। इसका आशय बताते हुए उन्होंने कहा कि नेकी कर दरिया में डाल। यदि मन का झरना शुद्ध है, तो जीवन के तालाब में कभी कीचड़ जमा नहीं होता।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
