कुंडलपुर तीर्थ के अतिशयकारी आदिनाथ भगवान के शिखर के ऊपर स्वर्ण कलश स्थापित किया गया तीर्थंकरों का दर्शन आज संभव नहीं समयसागर महाराज

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कुंडलपुर तीर्थ के अतिशयकारी आदिनाथ भगवान के शिखर के ऊपर स्वर्ण कलश स्थापित किया गया तीर्थंकरों का दर्शन आज संभव नहीं समयसागर महाराज
कुंडलपुर
सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में आचार्य श्री 108 समय सागर महाराज संघ सानिध्य में बड़े बाबा आदिनाथ जिनालय, जिनबिब वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत मंगलवार की बेला में सर्वप्रथम श्री जी का अभिषेक एवं शांति धारा की गई। पूजन उपरांत बड़े बाबा के जिनालय में दाएं एवं बाएं के जिनालय में कलशारोहण की क्रियाएं महाराज श्री संघ सानिध्य में हुई।

 

 

स्वर्ण कलश के ऊपरी भाग पर आचार्य श्री समय सागर जी महाराज एवं समस्त मुनि संघ द्वारा चंदन से स्वास्तिक बनाया गया। इसके बाद आलम यह रहा की हर किसी में स्वास्तिक बनाने की होड़ सी लग गई। कलश के ऊपरी भाग पर कलशारोहण कर्ताओं को क्रेन के द्वारा ऊपर मंदिर के शिखर पर पहुंचाया गया। प्रतिष्ठाचार्य श्री विनोद भैया ने समस्त क्रियाएं संपन्न करवाई।

बड़े बाबा आदिनाथ भगवान के शिखर के ऊपर आजू-बाजू बने मंदिरों के शिखर पर प्रातः बेला में कलशारोहण गाजे बाजे के साथ संपन्न हुआ इस मांगलिक बेला में हजारों भक्तों ने अभिषेक शांति धारा कर अपनी सहभागिता दी।

 

 

 

जयपुर के कारीगरों ने तैयार किया कलश
निर्माण कमेटी के सावन रेसु सिंघई ने जानकारी देते हुए बताया कि कलश तैयार करने के लिए जयपुर से कारीगर आए थे। उन्होंने कुंडलपुर में ही कलश तैयार किए हैं। एवं आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के प्रकल्प को पूरा किया है। उन्होंने बताया कि पंच कल्याण के दौरान यह निर्णय लिया गया था, इसके बाद निरंतर सोना दान में मिला था इसके बाद कमेटी ने स्वर्ण कलश बनाने का काम कराया।


मांगलिक बेला में आचार्य श्री समय सागर महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि साक्षात तीर्थंकरों का दर्शन आज संभव नहीं है, किंतु तीर्थंकरों की वाणी को आत्मसात करते हुए, आत्म कल्याण करते हुए मोक्षमार्गियो को मार्ग प्रशस्त किए है।

 

 

 

उन्होंने आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज का जिक्र करते हुए कहा कि चतुर्विध संघ के नायक हैं वह उन्होंने जो मार्ग प्रशस्त किया है। 50 55 साल में जो प्रभावना की है। उसका कथन करने के लिए हम लोगों के पास शब्द नहीं है। अभूतपूर्व प्रभावना उन्होंने की है।

 

महाराज श्री ने कहा कि 1976 में आचार्य महाराज संघ सहित कुंडलपुर आए, यहां का वातावरण देखा पहाड़ के ऊपर नीचे मिलकर 62 जिनालय थे, उनका दर्शन, उनकी वंदना की। उसमें हम भी शामिल थे। और उस समय क्षुल्लक अवस्था थी। वातावरण केसा था, उसका वर्णन भी हम नहीं कर पाएंगे, लेकिन उस समय जो कुंडलपुर का रूप था वर्तमान में जो आप लोग गगन को छूने वाले उतंग शिखर के साथ बड़े बाबा जिनालय का दर्शन भारतवर्ष के नही, देश विदेश के लोग आकर के बड़े बाबा का दर्शन करते हैं। उनको लगता होगा यह सपना तो मैं नहीं देख रहा हूं। ऐसा
अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिलता। ऐसा सारा कार्य वह जो परिकल्पना उनकी रही है, अद्भुत परिकल्पना है, और उस परिकल्पना को उन्होंने साकार रूप दिया है।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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