अयोध्या भारत के लोगो का प्राण है वहा प्राण प्रतिष्ठा हो रही है सुधासागर महाराज पूज्य गुरुदेव अयोध्या के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में विशिष्ट अतिथि के रूप में मिला आमंत्रण

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अयोध्या भारत के लोगो का प्राण है वहा प्राण प्रतिष्ठा हो रही है सुधासागर महाराज पूज्य गुरुदेव अयोध्या के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में विशिष्ट अतिथि के रूप में मिला आमंत्रण
आगरा
जहा जहा पूज्य गुरुदेव निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव 108सुधासागर महाराज के चरण पड़े वहा वहा कीर्तिमान बनते चले जाते है,

 

 

ऐसा ही कुछ हुआ शुक्रवार के अनुपम क्षणों में जब पूज्य गुरुदेव ताज के समक्ष्य अपना मंगल प्रवचन दे रहे थे जो अपने आप में अनुपम था इन्ही अनुपम पलो में एक और खुशखबरी आई जनवरी में होने जा रहे अयोध्या के राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है इस प्राण प्रतिष्ठा हेतु विश्व हिंदू परिषद के प्रांत की प्रमुख जन पधारे और उन्हें इस प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारने हेतु निवेदन एवं आमंत्रण देने आए जो अपने आप में एक अनुपम है।

उन्होंने गुरुदेव के चरणों में श्रीफल समर्पित किया और एक पत्र भी गुरुदेव को दिया।

 

 

इस अवसर पर पूज्य महाराज श्री ने कहा कि भारत की कुछ स्थान ऐसे हैं जिन्हें हम ऐतिहासिक भी नहीं कह सकते, बल्कि हम उन्हें सृष्टि के साथ जोड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि सृष्टि ऐतिहासिक नहीं होती है सृष्टि शाश्वत होती है।

 

 

 

 

पूज्य गुरुदेव ने इस विषय पर बोलते हुए कहा कि भारत का ऐसा कोई दर्शन नहीं है जिसका संबंध अयोध्या से ना हो अयोध्या एक भारत का एक ऐसा स्थान है जो प्रलय के बाद भी कभी नष्ट नहीं होता। जैन पुराणों के विषय में कहा कि जैन पुराणों में अयोध्या की एक अलग ही हिस्ट्री आई है, जितने भी तीर्थकर आए है जितने भी तीर्थंकर अनंत काल से जन्म लेते हैं वह अयोध्या में ही जन्म लेते हैं। और सम्मेद शिखर तीर्थ से निर्वाण प्राप्त करते है। भारत देश जितने भी भगवानों का जन्म भारत देश में हुआ है, भारत देश उन सबका है।

एक समय ऐसा आएगा जब सृष्टि पर पहले आ जाएगा और सब कुछ नाश हो जाएगा। जब प्रलय आएगा तो उसके चिन्ह क्या बचेंगे, तब मात्र बचेगा तो अयोध्या का स्थान। एक रोचक जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि अयोध्या के नीचे एक स्वर्णमयी नंध्यावृत्त है। जब आकाश से आग और पृथ्वी बरसेगी सब स्वाहा हो जाएगा। तब स्वर्णमयी नंध्यावृत निकल कर आएगा जो अयोध्या के बीच में है। वह निकाल कर ऊपर आएगा। उसी समय देवता आकर इस स्वर्णमयी नंध्यावृत की पूजा करेगे, जैसे ही इसकी पूजा होगी वैसे ही सृष्टि से प्रलय खत्म होगा। और पुनः मानव संरचना शुरू होगी।

महाराज श्री ने कहा कि कहने का तात्पर्य है कि सृष्टि मिटती है तो उसका मूल स्रोत मिलता है अयोध्या अयोध्या तो वैसे ही हम सब भारतवासियों के लोगों का प्राण है, अयोध्या ने काफी उपसर्ग झेले है, अयोध्या हम सब का प्राण है और वहां प्राण प्रतिष्ठा हो रही है मेरा बहुत-बहुत आशीर्वाद है।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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