प्रकृति है तो हम हैं, इसके साथ जब भी खिलवाड़ होगा तो नुकसान हमें ही उठाना पड़ेगा स्वस्ति भूषण माताजी
केशवरायपाटन
परम पूजनीय भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105 स्वस्तिभूषण माताजी ने पर्यावरण संरक्षण एवं वृक्षारोपण करने की बात कही।
अपने धारा प्रवाह प्रवचन में ओजस्वी वाणी से गुरु मां ने कृतार्थ करते हुए कहा कि प्रकृति है तो हम हैं, इसके साथ जब भी खिलवाड़ होगा तो नुकसान हमें ही उठाना पड़ेगा।
माताजी ने कहा की धरती पर जंगल कम और मकान ज्यादा हो गए हैं। बढ़ता तापमान उसी का परिणाम है। इसीलिए हमें पौ



धा लगाकर उसे वृक्ष बनाने तक की जिम्मेदारी निभानी होगी।

माताजी ने कहा कि वैज्ञानिक दृष्टि से वृक्ष में भी जीव होता है। यह बात भगवान महावीर स्वामी ने ढाई हजार वर्ष पहले केवल ज्ञान में बता दी थी। वृक्ष एक इंद्रीय जीव है। ऐसे ही पेड़ों की कटाई होती रही, जंगल नष्ट होते रहे तो पृथ्वी पर विनाश का दिन दूर नहीं है।

पूज्य माताजी ने कहा कि आजकल लोगों की इच्छाएं बढ़ती जा रही हैं, सभी को बड़ा मकान बनाने की चाह है, याद रखना एक दिन हमारी यह चाह ही हमारे विनाश का कारण बनेगी।
पहले तो हम पेड़ों काटते हैं फिर बीमार पड़ने पर दवाई के लिए उन्ही पेड़ों को ढूंढते फिरते हैं, पेड़ हमें प्राण, वायु, फल छाया देते हैं। पेड़ों के फल का प्रयोग करना पाप नहीं है, लेकिन पेड़ों को काटना पाप
है। किसान खेती करता है, वह पकी हुई फसल को काटकर निकाल लेता है। यह अनाज के रूप में हमारे घरों में आता है। किसान को उसका दोष नहीं लगता है, क्योंकि पक्की हुई फसल जीव रहित हो जाती हैं। जैन धर्म में जमीकंद आलू,गाजर, मूली खाना निषेध माना गया है। जमीकंद के अंदर अनंत जीव होते हैं, जो वनस्पति सूर्य की रोशनी में नहीं उगती है, वह सात्विक भोजन वालों के लिए उपयोगी नहीं है। आप स्वस्थ शरीर में मस्तिष्क से चाहते हो, तो सूर्य के प्रकाश में उगने वाली शाक सब्जी का उपयोग करना चाहिए। खासकर विद्यार्थियों को तामसिक भोजन नहीं करना चाहिए। तामसिक भोजन से शरीर में कई विकार पैदा होने लगते हैं। प्रयास यह भी किया जाना चाहिए कि फास्ट फूड का उपयोग कम से काम किया जाए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
