गणिनी आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी के सानिध्य में विद्वत परिषद का शिक्षण एवं प्रशिक्षण शिविर का हुआ शुभारंभ एक जला हुआ दीपक सो दीपक को प्रकाशित कर सकता है स्वस्ति भूषण माताजी

धर्म

गणिनी आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी के सानिध्य में विद्वत परिषद का शिक्षण एवं प्रशिक्षण शिविर का हुआ शुभारंभ एक जला हुआ दीपक सो दीपक को प्रकाशित कर सकता है स्वस्ति भूषण माताजी
केशवरायपाटन
अतिशय क्षेत्र केशवरायपाटन में पूज्य गुरु मां स्वस्ति भूषण माता जी के सानिध्य में विद्वत प्रशिक्षण एवं शिक्षण शिविर का शुभारंभ हुआ।

 

 

 

पूज्य गुरु मां 105 स्वस्तिभूषण माताजी ने कहा कि आज केशवरायपाटन की इस पावन भूमि पर देश के वरिष्ठ ज्ञानी विद्वान ज्ञान के उपासक ज्ञान के जानने वाले और ज्ञान के मानने वाले उपस्थित हुए हैं! शास्त्री परिषद् के इस शिक्षण प्रशिक्षण शिविर के माध्यम से जो ज्ञान की गंगा केशवराय पाटन नगर में बहेगी उसका लाभ आस-पास के सभी श्रावकों भी प्राप्त होगा!

पूज्य माताजी ने कहा ज्ञान हमारी व्यक्तिगत संपदा है! जमीन के अंदर जैसे पानी विद्यमान है! वैसे ही हमारे अंदर ज्ञान विद्यमान है! जो कि ज्ञानवरणी कर्म के प्रभाव से ढका हुआ है! बस क्षयोपशम बढ़ाने के लिए पुरुषार्थ एवं परिश्रम की आवश्यकता है!

 

 

 


सौ बुझे हुए दीपक रखे हैं और एक जला हुआ दीपक रखा हुआ है! एक जला हुआ दीपक सौ बुझे दीपकों को प्रकाशित कर सकता है! आज यहां बहुत सारे लोग बैठे हैं! किसी में ज्ञान प्रकाश कम है किसी में ज्यादा है! तो ज्यादा ज्ञान प्रकाश वाले विद्वान कम ज्ञान प्रकाश वाले विद्वानों को प्रकाशित करने का कार्य करेगें! गर्मियां चल रही है सभी की छुट्टियां भी हैं आजकल बहुत से शिविर लगते हैं मेंहदी शिविर व्यंजन शिविर आदि! लेकिन ये शास्त्री परिषद् का शिविर सम्यक ज्ञान को बढ़ाने का शिविर है! ये समागम बड़े पुण्य से प्राप्त होता है!
तृप्ति नहीं हैं हम कितना ही पानी पी लें लेकिन कुछ समय बाद फिर से प्यास लग जाती है! कितना ही भोजन कर लें लेकिन फिर से भूख लग जाती है! आत्मा का भोजन ज्ञान है आत्मा की प्यास ज्ञान है जिस दिन ज्ञान का भोजन ज्ञान का जल पी लिया उस दिन आत्मा तृप्त हो जायेगी संतुष्ट हो जायेगी!
हम संसार में डॉक्टर बनने का ज्ञान इंजीनियर बनने का ज्ञान ले रहे है जो पेट भरने के लिए पैसा कमाने के ही काम आएगा ! लेकिन सम्यक ज्ञान तो हमारी आत्मा की तृप्ति के लिए है! सोने की चेन पहन लेने से आत्मा को चैन प्राप्त नही होगा! और बैचेन हो जाएंगे! कहीं खो न जाए कहीं चोरी न हो जाए! घर में गाड़ी न हो घर में ए सी न हो तो भी चल जायेगा! लेकिन घर में धर्म न हो धर्म के संस्कार न हो तो तीन काल में भी चलने वाला नही है!

अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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