जिनकी इच्छाएं समाप्त हो जाती है और सांस बाकी रहती है वह संत होते हैं और जिनकी सांस समाप्त हो जाती है किंतु इच्छाएं समाप्त नहीं होती वह संसारी प्राणी होते हैंआर्यिका श्री सृष्टिभूषण माताजी
ललितपुर
आचार्य श्री सुमतिसागर जी की परम शिष्या जिनधर्म प्रभाविका वात्सल्य मूर्ति गणनी आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी का बुंदेलखंड के सिद्ध एवम अतिशय क्षेत्रों के लिए विहार चल रहा है।समाज के निवेदन पर ग्रीष्मकालीन वाचना के लिए ललितपुर के श्री पार्श्वनाथ अटा दिगंबर जैन मंदिर में आर्यिका श्री विश्वयश माताजी सहित विराजित है। मंगलाचरण के बाद धर्म सभा में परमपूज्य आर्यिका श्री सृष्टिभूषण माताजी ने उपदेश में बताया कि संसारी प्राणी जब एक गली भूल जाता है मकान भूल जाता है तो व्याकुल हो जाता है ,परेशान हो जाता है अपने निवास को खोजता है किंतु 84 लाख योनियों में भ्रमण करते हुए आप कितने भव में कितने जन्म लेकर घूम रहे हैं मगर आप उसमें परेशान नहीं है उसकी चिंता आपको नहीं है।



संसारी प्राणी भव समुद्र से पार उतरने की भगवान से कामना करता है संसार में नाव वह होती है जो पार लगा दे और समुद्र वह होता है जिसका कोई पार नहीं है। आज का इंसान कमाने में इतना दौड़ता है ,इतना दौड़ता है कि दौड़ते दौड़ते जिंदगी में सब छोड़ कर दम तोड़ देता है ।जीवन भर में कमाया सब मौत के लिए छोड़ देता है। बचपन में आप खिलौने के लिए झगड़ते हैं, जवानी में आप संपत्ति के लिए झगड़ते हैं, बुढ़ापे में जमीन जायदाद के लिए झगड़ते हैं । यह मनुष्य जीवन जिंदगी कर्मों से लड़ने के लिए मिली है। मौत जब आती है तब चल ,अचल ,संपत्ति परिवार, समाज ,शोहरत सब यही धरा का धरा रह जाता है। जिंदगी में आप जितनी आसक्ति रखोगे उतनी विपत्ति पाओगे ।
मकान से बहुत अधिक आसक्ति अगर होगी तो मर कर इस मकान में छिपकली बनकर रहोगे, बेटे से बहुत ज्यादा प्रेम आसक्ति रखोगे तो मच्छर बनकर उसके कान में लोरी भिन-भिन कर सुनाओगे परिणाम जानते ही हो कि क्या होगा ।आप मंदिर में जाकर परमात्मा की कमी निकालते हो भगवान मुझे कुछ नहीं दिया, यह जो दिया वह कम दिया ।सभी प्राणियों को सभी से आपस में मिलने पर अपने मजहब वाले को अपने मजहब अनुसार भगवान का स्मरण करना चाहिए सभी मजहब वाले मुस्लिम सलाम बोलते हैं ,हिंदू श्री राम का नारा लगाते हैं , सिख सत श्री अकाल कहते हैं जैन को भी जुहार कर जय जिनेंद्र बोलना चाहिए। जय जिनेंद्र या सुबह का नमस्कार औपचारिकता नहीं है आप जब किसी को जय जिनेंद्र कहते हैं तो सामने वाला भी आपको जय जिनेंद्र बोलकर जय बोलता है ।
आधुनिक परिवेश में प्रचलन के अनुसार हाय-हाय हेलो हेलो बोलते हैं इसमें आप जीवन पर हिलते ही रहोगे। पहले जमाने में आपसी प्रेम समन्वय इतना था कि एक खटिया पर, एक लकड़ी के तख्त पर छह लोग आठ लोग प्रेम से बैठ कर बाते करते थे अब कुर्सी भी दूरी पर लगती है मीडिया प्रभारी अक्षय अलया एवम डा सुनील संचय अनुसार आर्यिका माताजी ने एक कथा के माध्यम से बताया कि एक पोता घर में वृद्ध महिला को कहता की दादी आप कब मरोगी ,दादी पूछती है कि बेटा यह क्यों पूछ रहे हो ,तब बच्चा भोलेपन से कहता है कि पापा मम्मी आपस में बात कर रहे थे कि यह बुढ़िया कब मरेगी तब इसका पैसा हमें मिलेगा इसलिए संसार को समझ कर आपको अपना धार्मिक इंतजाम कर आत्मा को समझना होगा तभी यह भव सुधरेगा ।बुढ़ापे में संतरा नींबू दिखेगा और भिंडी हरी मिर्च दिखेगी तो बुढ़ापे में भगवान कैसे दिखेगा। दुख आता है तब आप भगवान को याद करते हैं आयकर का छापा पड़ता है तो भगवान याद आते हैं।
माताजी ने इंसान के जन्म की नई परिभाषा में बताया कि लोग कहते हैं इंसान खाली हाथ आता है, खाली हाथ वापस जाता है ।
माताजी ने बताया कि मनुष्य जब जन्म लेता है तो अपने पुण्य साथ लेकर आता है और मरने के बाद जो जीवन भर में कार्य किए हैं अच्छे कार्य या बुरे कार्यों के अनुसार पुण्य और पाप साथ लेकर जाता है।
संत और संसारी प्राणी की विवेचना में बताया कि संत की इच्छा समाप्त हो जाती है और सांस शेष रहती हैं,जबकि संसारी प्राणी की सांस समाप्त होकर मृत्यु होने तक इच्छा समाप्त नहीं होती। श्री पार्श्वनाथ मंदिर समिति ने अतिथियों का स्वागत कर बहुमान किया। शाम को श्री जी की आरती के बाद गुरु भक्ति होती है
राजेश पंचोंलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
