पृथ्वी को व्यर्थ नहीं खोदना चाहिए स्वस्ति भूषण माताजी
केशवरायपाटन
परम पूजनीय भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105 स्वस्ति भूषण माताजी ने गुरुवार की बेला में मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि हमारा शरीर पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, वनस्पति के माध्यम से ही चलायमान है। यह स्थावर जीव होते हैं। इनकी रक्षा आदर करना हमारा कर्तव्य होना चाहिए।
पूज्य माताजी ने कहां की पृथ्वी को व्यर्थ नहीं खोदना चाहिए। जल,अग्नि, वायु,वनस्पति सभी का सदुपयोग करना चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इनका दुरुपयोग हमारे जीवन को खतरे में डाल सकता है। उन्होंने पानी की कीमत को बताया कि पानी की कीमत को प्यासा ही जान सकता है।
जो पानी घरों में आ रहा है, उसकी जो कीमत चुका रहे हैं वह बहुत कम है। इसलिए इसका दुरुपयोग नही करना चाहिए। पानी की बूंद की कीमत तड़पते पशु पक्षियों से लगाई जा सकती है। हमें आने वाली पीढियो का जीवन सुरक्षित रखना है तो पानी का दुरुपयोग आज से ही बंद करना होगा।
जैन दर्शन के विषय में बताते हुए उन्होंने कहा कि पानी की एक बूंद में 36450 जीव होते हैं ऐसा जैन दर्शन में बताया गया है। हम असंख्यात जीवो की हिंसा पानी के दुरुपयोग के द्वारा ही करते हैं। जिससे हमारे पाप कर्म का बंध हो रहा है।





उन्होंने एक उदाहरण के माध्यम से बताया कि घी तो बनाया जा सकता है, लेकिन पानी नहीं बनाया जा सकता। घी खाए बिना
जीवित रहा जा सकता है, लेकिन पानी के बिना नहीं। उन्होंने कहा कि कुए से सिर पर रखकर पानी लाते थे तब तो पानी की कीमत थी
, लेकिन जब से पानी पाइपो के द्वारा आने लगा है, तब से मनुष्य ने पानी की कीमत को कम आंकना शुरू कर दिया है। इसीलिए पानी की बचत करना सीखो, और अपनी पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित रखो।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
