बुजुर्ग अतीत और युवा भविष्य में जीता है इसलिए निराशा रहता है आचार्य श्री सुनील सागर महाराज
किशनगढ़
आचार्य श्री सुनील सागर महाराज ने सन्मति समवशरण में समाधि तंत्र गाथा ग्रंथ पर प्रवचन देते हुए कहा की वक्त किसी का इंतजार नहीं करता लेकिन सबको इंतजार करवाता है। कम समय में अच्छे भक्त बनने पर भी बेड़ा पार हो जाएगा। बुजुर्ग अतीत और युवा भविष्य में जीता है इसीलिए निराशा रहता है। बालक वर्तमान में जीता है इसीलिए खुश रहता है। भूत और भविष्य में नहीं वर्तमान में जीना चाहिए। भेद विज्ञान व सम्यक ज्ञान से वैराग्य होता है।
वर्तमान में जीने वाला वर्धमान बनता है। मनुष्य पर्याय के लिए धर्म, सेवा,भक्ति, पूजा, स्वाध्याय आत्म चिंतन जरूरी है। कर्तव्य करना चाहिए कर्ता बनने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। मानव जीवन पाकर संयम लेना, साधना की पथ पर बढ़ने वाले जीव का कल्याण होगा।






सम्यक दर्शन से सम्यक ज्ञान होगा। सम्यक दर्शन ज्ञान होते ही मोह को मिटाने के लिए चारित्र का मार्ग स्वीकार करना चाहिए। चारित्र का मार्ग आनंद का मार्ग है। जो जीव इस मंगलकारी चारित्र मार्ग पर चलता है वह भव भव के भ्रमण को मिटाकर सिद्ध स्वरूप को प्राप्त करते हैं। कलयुग में भी तत्व मार्ग उपलब्ध है।
आज का युवा मोबाइल अधिकता के साथ खाओ पियो मौज करो में डूबा हुआ है। वही संयम, साधना के पथ पर बढ़ने वाले युवाओं के दर्शन हो तो कलयुग का सौभाग्य है। संयम, दीक्षा, सल्लेखना मार्ग पर जाने वालों की अनुमोदना जरूर करना चाहिए। आत्म कल्याण का मार्ग संयम है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
