गुरुदेव चले गए हैं पर गुरुदेव हमारे पास हैं दुर्लभ सागर महाराज
कुंडलपुर
सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में अपने प्रवचनों में पूज्य मुनि श्री 108 दुर्लभ सागर महाराज ने आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के विषय में प्रकाश डाला उन्होंने कहा युग बीतते है, सृष्टि बदलती है। कहीं युग दृष्टा जन्म लेते हैं अनेक स्मृतियां शेष रह जाती हैं। कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जो अपने करुणामयी महती कार्यों से युग युगांतर तक याद किए जाते है। असंख्य जन मानस को घने तिमिर से निकालकर उज्जवल प्रकाश से प्रकाशित कर दिया। ऐसे निरीह, निर्लिप्त, निरपेक्ष, अनियत बिहारी स्वालंबी जीवन जीने वाले युग पुरुष की सर्वोच्च श्रेणी में आते हैं। वे हमारे गुरुदेव विद्यासागर महा मुनिराज।
महाराज श्री ने आगे कहा कि जिन्होंने स्वेच्छा से अपने जीवन को पूर्ण वीतरागमय बनाया। जिन्होंने त्याग और तपस्या से कार्य किया। स्वयं के रूप को स्वरूप को संयम के सांचे में डाला, और अनुशासन को ही अपनी ढाल बनाया, ऐसे महान गुरु हमें पंचम काल में दर्शन दे रहे थे। और हम सब का कल्याण किया।





महाराज श्री ने आगे कहा कि गुरुदेव चले गए है, पर गुरुदेव हमारे पास हैं। गुरुदेव की आंखों को लेकर कुछ लिखा था जिनके अंदर आदर भाव झलकता हो, जिनको देखकर अभिनंदन भाव झलकता हो, जिनको देखकर अकिंचन भाव होता होऔर अहो भाव होता हो, जिन आंखों को देखकर हम झुक जाएं, अपने आप को अर्पित कर दें वह है आदर भाव। जिन आंखों को देखने से हमारा अहम भाव गल जाए उनकी अहमियत से अपने जीवन को समतामय बना ले ये है आदर भाव। जिन आंखों को देखने से हमारे दर्द कि भटकन और संसार की अटकन समाप्त हो वह आंख हमारे जीवन को संवारने वाली हो।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
