चारित्र चक्रवती आचार्य शान्तिसागर जी महाराज के 150 वी जन्म जयंती पर भाव भीनी अभिव्यक्ति
श्री शांति वीर शिव धर्म अजीत वर्धमान सुर्रिभ्यो नमः

बीसवीं सदी के प्रथम आचार्य चारित्र चक्रवर्ती गुरु नाम गुरु प्रातः स्मरणीय आचार्य श्री शान्तिसागर जी महामुनि के अवतरण दिवस मिति अनुसार आषाढ़ कृष्णा 6 बुधवार दिनांक अनुसार 25 जुलाई सन 1872
150 वे जन्म वर्ष 2022 पर कोटिशः नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु
भोज ग्राम के श्रीमती सत्यवती जी श्री भीमगोड़ा जी पाटिल के यहां सन 1872 7 में 1008 श्री वासु पूज्य भगवान के गर्भ कल्याणक दिवस आषाढ़ कृष्णा 6 विक्रम संवत 1929 एक महामना का जन्म हुआ जिनका नाम सात गोंडा जी रखा गया आपसे बड़े 2 भाई तथा एक भाई छोटा तथा एक बहन भी थी आपमे बचपन से ही
धार्मिक संस्कार रहे 18 वर्ष की उम्र में अपने बिस्तर का त्याग कर दियाआजीवन ब्रहचर्य व्रत
आपने 18 वर्ष की अल्पायु में श्री सिद्ध सागर जी से आजीवन ब्रहचर्य व्रत लिया 25 वर्ष की उम्र में जूते चप्पल का त्याग कर दिया 32 वर्ष की उम्र में अपने सम्मेद शिखर जी की यात्रा की घी और तेल का आजीवन त्याग कर दिया शिखरजी की यात्रा के बाद 32 वर्ष की उम्र में ही एक समय भोजन का नियम ले लिया जीवन आपने एक समय ही भोजन कियाएक आत्मा जो पुण्यात्मा बन कर धर्मात्मा बन कर परमात्मा बनने की राह पर है उनका गुणानुवादसन् 1915 में आपने उत्तर ग्राम में क्षुल्लक दीक्षा श्री देवेंद्र कीर्ति जी स्वामी से ली ऐलक दीक्षा आपने गिरनार यात्रा सन 191I8 में 1008 श्री नेमिनाथ भगवान की 5 वी टोंक पर स्वयम ने ऐलक दीक्षा ली। वही सन 1920 यरनाल कर्नाटक में आपने मुनि दीक्षा ग्रहण की आपको सन 1924 में आचार्य पद दिया गया सन 1925 में श्री श्रवण बेलगोला महामस्तकाभिषेक के बाद गुरुणा गुरु की उपाधि दी गई आपने दीक्षा गुरु श्री देवेंद्र कीर्ति जी को पुनः मुनि दीक्षा दी इसलिए भी गुरुणा गुरु कहा जाता है। सन 1937 में आपको चारित्र चक्रवर्ती पद दिया गया
जिनवाणी संरक्षण आपकी प्रेरणा से धवल जय धवल टीका वाले षटखंडागम महाबंध कषाय पाहुड ग्रन्थ त्रय को 50 मन तांबे पर 2664 पत्रों पर अंकित कराया यह ग्रंथ आज भी फलटण में सुशोभित विराजित है उपसर्ग
आपके जीवन मे सर्प के कोंगनोली गोकाक कौंनुर शेडवाल आदि 5 से अधिकअनेक उपसर्ग सिंह के गोकाक,मुक्तागिर जंगल,श्रवणबेलगोला यात्रा,सोनागिर, बावनगजा, द्रोणगिरी सिद्ध क्षेत्रो 6 से अधि उपसर्ग हुए सबसेअधिक मकोड़े के चींटी के मानव जन्य उपसर्ग हुए है। आपने नाम अनुरूप शांति के सागर बन कर उपसर्ग सहन किये आपने अपने जीवन के साधु जीवन के 40 वर्षों में 9938 उपवास किए आपने 26 मुनि दीक्षा दी प्रथम मुनि शिष्य श्री वीरसागरजी महाराज हुए 4आर्यिका दीक्षा प्रदान की जिनमेप्रथम आर्यिका 105 श्री चन्द्रमती माताजी रही साथ ही उनके द्वारा 16 ऐलक दीक्षा प्रदान की जिनमे प्रथम ऐलक 105 श्री पारीस सागर जी हुए साथ ही 28 क्षुल्लक दीक्षा प्रदान की गई। जिसमें प्रथम क्षुल्लक श्री नेमकीर्ति जी हुए दीक्षा के क्रम में 14 क्षुल्लिका दीक्षा प्रदान की प्रथम क्षुल्लिका श्री शांतिमति जी रही। साथ ही इनके 16 ऐलक दीक्षा प्रदान की जिनमे प्रथम ऐलक 105 श्री पारीस सागर जी हुए साथ ही 28 क्षुल्लक दीक्षा प्रदान की गई जिनमे प्रथम ऐलक 105 श्री पारीस सागर जी हुए साथ ही 28 क्षुल्लक दीक्षा प्रदान की गई। जिसमें प्रथम क्षुल्लक श्री नेमकीर्ति जी हुए दीक्षा के क्रम में 14 क्षुल्लिका दीक्षा प्रदान की प्रथम क्षुल्लिका श्री शांतिमति जी रही। कुल 88 आपने दीक्षाएं दी। आपके बड़े भाई ने भी आपसे मुनि दीक्षा लेकर मुनि श्री वर्द्धमान सागर जी बनेआपने 9938 उपवास जो किए हैं वह इस प्रकार हैं1234 चारित्र शुद्धि, 720 तीस चौबीसी,468 कर्म दहन 3 बार 270 सिंह निष्क्रीडित, 256 सोलह कारण 16 बार, 36 श्रुतपंचमी, 20 विहरमान 20 तीर्थंकर, 10 दश लक्षण,8 सिद्ध भगवान के, 8 अष्टान्हिका,व अन्य उपवास सहित 9838 उपवास किये
1105 दिन तक अनाज का त्याग विधर्मियो के मंदिर प्रवेश के विरोध में किया उन्हें 8 वर्षो तक श्रावको ने केवल दूध चावल पानी दिया व 8 दिन तक आहार में पानी ही नही दिया। ललितपुर चातुर्मास सन 1929 में सभी रसों का आजीवन त्याग किया 24 अक्टूम्बर 1951 में गजपंथा जी मे 12 वर्ष की नियम सल्लेखना ली।
26 अगस्त 1955 को लिखित पत्र से मुनि श्री वीर सागर जी को आचार्य पद दिया व 36 दिन की सल्लेखना में 18 सितम्बर 1955 को आपकी उत्कृष्ट समाधि हुई।वर्तमान में आपकी मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परम्परा में पंचम पट्टा धीश पद को वर्ष 1990 से वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी सुशोभित कर वर्ष 2021 का चातुर्मास कोथली में किया है। अब गुरुदेव का श्री महावीर जी अतिशय क्षेत्र राजस्थान में 24 वर्ष बाद आयोजित 1008 श्री महावीर स्वामी के महामस्तकाभिषेक के लिए श्री महावीर जी अतिशय क्षेत्र राजस्थान में विराजित है18 जुलाई 2022 को चातुर्मास कलश स्थापना ससंघ ने की है
सभी आचार्यो को कोटिशः नमोस्तु राजेश पंचोलिया इंदौर वात्सल्य वारिधि भक्त परिवार 9926054065
संकलनकर्ता
अभिषेक लुहाड़िया रामगंजमंडी
