नारी का कौशल कभी भी काम आ सकता है, निर्वेंगसागर महाराज

धर्म

नारी का कौशल कभी भी काम आ सकता है, निर्वेंगसागर महाराज
गढ़ाकोटा
बड़े जैन मंदिर में इन दिनों पूज्य मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज संघ सानिध्य में धर्म की गंगा बह रही है।

 

सोमवार की बेला में पूज्य मुनि श्री निर्वेंगसागर महाराज ने हिंसा के विषय में बताते हुए कहा कि खेती में कभी भी किसान के परिणाम हिंसा के नहीं होते हैं। इसीलिए उन्हें अन्नदाता कहा जाता है। और किसी को अन्नदाता की संख्या नहीं दी गई है। किसान के भाव बहुत ही निर्मल होते हैं।

 

महाराज श्री ने किसान के विषय में बताते हुए कहा कि किसान यह नहीं सोचता कि हमें खेती नहीं करना, बल्कि वह खेत में सभी जीवो के होने के बावजूद किसान खेत में फसल उगाता है। किसान का सद्भाव है कि जब हम खेत में फसल पैदा करेंगे तब ही तो लोगों के पेट भरेंगे।

 

 

 

उन्होंने नारी शक्ति के विषय में भी प्रकाश डाला और कहा कि एक शिक्षित नारी अपने परिवार को संभाल सकती है। भले ही वह नौकरी ना करें। आए दिन परिवारों में तलाक होने लगे हैं। पैरों पर खड़े करने का अर्थ क्या है कि वह हर परिस्थिति में सामना कर सके।महाराज श्री ने प्रभु आदिनाथ के विषय में बताया कि उन्होंने अपनी बेटियों को अंक और लिपि विद्या सिखाई नारी को शिक्षित करने का काम आदिनाथ के युग से हो गया था। बोलचाल में हमेशा महिला को धर्मपत्नी कहा जाता है। पुरुष के साथ धर्मपति नहीं बोला जाता है। क्योंकि एक पत्नी अपने पति को धर्म से जोड़ सकती है। लेकिन एक पति अपनी पत्नी को धर्म के मार्ग से जोड़ने में अक्षम माना जाता है।उन्होंने कहा कि एक कुत्ते के गले में चैन डाल दो तो वह उसे सोने का हार समझकर घूमता रहता है। लेकिन एक शेर की गले में चैन नहीं पहनाई जा सकती। दोनों के स्वभाव में स्वाधीनता और पराधीनता का अंतर है।

 

 

महारानी लक्ष्मीबाई के विषय में महाराज श्री ने कहा कि जब राज्य पर संकट आया तो घर के चूल्हे चौके को छोड़कर महारानी लक्ष्मीबाई ने हाथ में तलवार उठा ली थी इसका आशय यही है कि नारी का कौशल कभी भी काम आ सकता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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