दान खुले मन से करना चाहिए आदित्य सागर महाराज
बूंदी
परम पूज्य मुनि श्री 108 आदित्य सागर महाराज ने देवपुरा स्थित संभवनाथ दिगंबर जैन मंदिर में धर्म सभा को संबोधित करते हुए दान के विषय में प्रकाश डाला उन्होंने कहा कि कभी किसी तीर्थ ट्रस्ट में दान करें तो परिणामों को विशुद्ध रखते हुए दान करना चाहिए। क्योंकि विशिष्ट भाव और उत्साह से किया हुआ दान ही श्रेष्ठ होता है। जो व्यक्ति मन मानकर दान करता है, उसका पुण्य नहीं मिल पाता है। इसीलिए दान खुले मन से करना चाहिए।
महाराज श्री ने वाणी की मधुरता के विषय में भी प्रकाश डाला और उन्होंने कहा कि वाणी की मधुरता ही इंसान को समाज में प्रतिष्ठा दिलवाती है। व्यक्ति को सदैव मधुर वचन ही बोलने चाहिए।






क्योंकि सज्जनों की पहचान मधुर वाणी से ही होती है। इसीलिए इंसान अपने मन में सहज भाव रखें। एक उदाहरण के माध्यम से महाराज श्री ने कहा कि बंदूक से निकली गोली और मुंह से निकले गलत शब्द से अनर्थ होने के आसार होते हैं। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी वाणी पर संयम रखना चाहिए।
इंसान को यह देखना चाहिए कि उसके बोलने से दूसरे व्यक्ति को नुकसान या बुरा तो नहीं लगेगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
