पूज्य निर्यापक श्रमण मुनिश्री योगसागर महाराज एवम निर्यापक श्रमण मुनिश्री नियमसागर महाराज के 45 वे दीक्षा दिवस पर भाव भरी अभिव्यक्ति
एक ऐसे महामना आचार्य जिन्होने अपना सर्वस्व स्व व पर कल्याण के लिए समर्पित किया ऐसे महामना आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज जिन्होने अनेको युवाओं को मोक्षमार्ग परअग्रसर करते हुए श्रमण बना दिया उन्ही आचार्य ने आज से लगभग 44 वर्ष पूर्व दो युवाओं को श्रमण बनाया उन्हे नाम दिया मुनि श्री 108 योगसागर महाराज मुनि श्री 108 नियमसागर महाराज
उस समय के बारे हम बात करे तो वैशाख कृष्ण अमावस्या सन 1980 मे परम पूज्य आचार्य गुरूवर श्री विद्यासागर जी महाराज के कर कमलों से आज के ही दिन म.प्र. प्रान्त के बुन्देलखंड की धरा- सागर नगर में मुनिश्री नियमसागरजी महाराज जी एवं मुनिश्री योगसागर जी महाराज जी की मुनि दीक्षा संपन्न हुयी थी।

इन दोनों ने धर्म की प्रभावना मे जो किया है वह युगों तक जीवंत रहने वाला है इन दोनों ने गुरु के द्वारा दी गयी दीक्षा और नाम को सार्थक किया पूज्य श्री योग सागर महाराज ने योग के द्वारा साधना तपस्या अपने निर्मोही जीवन से मानव जगत को सदउपदेश दिया पूज्य श्री नियमसागर महाराज नियम संकल्प की द्रढ़ता को अंगीकार सभी को नियम संकल्प की और मानव एवम प्राणी मात्र का उपदेश दिया निश्चित रूप से दोनों मुनिराजो ने श्रमण परम्परा को अक्षुण रखा है जिसका सम्पूर्ण जगत ऋणी रहेगा



आचार्य गुरुवर कहा करते थे संघ को गुरुकुल बनाना जो आज भी जीवंत है पंचम युग मे चतुर्थ युग की चर्या का उदाहरण संघ मे परिलक्षित होता धन्य है महामना आचार्य गुरुवर विद्यासागर अमावस की तिथि को पावन पुनीत कर दिया दोनों मुनिराजो के लिए यही भावना भाते है आपका संयम जीवन बढता रह आप दीर्घायु हो आपका रत्नत्रय उतरोतर प्रगति की और अग्रसर हो यही भावना यही कामना
यही कहूँगा जो कामना की साधना से कोसो दूर है
कही न कही ऐसे संत भी जरुर है
अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी 9929747312
