जो काम दवा से नही होता है, वह काम दुआओं से हो सकता है स्वस्तिभूषण माताजी
केशोरायपाटन
चंबल नदी के तट पर स्थित भगवान मुनिसुव्रतनाथ भगवान का जन्म कल्याण महोत्सव स्वस्तिभूषण माताजी के सानिध्य में हो रहा है। शनिवार की बेला में भक्तों में अभिषेक करने का ताता सा लग गया एवम लगभग 1000 जोड़ो ने संगीत की स्वर लहरियों में भक्ति भाव के साथ महामंडल विधान किया।
इस बेला में पूज्य गुरु मां स्वस्ति भूषण माताजी ने कहा की जो काम दवा नहीं हो सकता वह दुआ से हो सकता है। इसलिए अपने कर्म ऐसे करो की दुआ मिलती रहे। दुआ अगर मिलती रहेगी तो दवा की जरूरत नही पड़ेगी। विनय एवम वैयावृति दोनो तपस्या है। तपस्या करने से पाप कर्मों का नाश व पुण्य कर्मों का उदय होता है।

उन्होंने कहा सेवा का काम घर से शुरू होना चाहिए सेवा के प्रति समर्पण ही सबसे बड़ा धर्म है। घर में अपने माता पिता, सास ससुर की सेवा में कोई कमी नही रखना चाहिए। घर में तो सेवा नही, साधु संतों की सेवा के लिए उतावले रहे, ऐसा नहीं होना चाहिए।





मन के अंदर हमेशा खिलाने की भावना रहनी चाहिए। खाने की भावना तो पशुओं में भी होती है।

मनुष्य अगर हो तो मनुष्य जैसे कर्म करना चाहिए।

मनुष्य का स्वभाव शांत रहने का है क्रोध मनुष्य का स्वभाव नहीं है।
जो भी समस्या जीवन में आती है वह क्रोध के कारण ही आती है। इसलिए प्रयास यही होना चाहिए की मन को शांत रखो।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
