जन्मदिन पर धार्मिक क्रिया करे, मुनिश्री विमलसागर महाराज
बांसातखेड़ा
परम पूज्य मुनि श्री विमल सागर महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जन्मदिन पर धार्मिक क्रियाएं करें, जितने वर्ष के हो गए हैं, उतने श्रीफल प्रभु को चढ़ाए, इतने दीपक से आरती करें, उतने गरीबों को दान करें, श्रीफल चढ़ाने से एक राज्य की प्राप्ति होती है। महाराज श्री ने कहा कि अपने जिन मंदिर के मूल नायक भगवान को एक श्रीफल अवश्य चढ़ाना चाहिए। एवं कोई भी कार्य शुरू करने से पहले श्रीफल जरूर चढ़ाना चाहिए।
धर्म सभा में पूज्य मुनि श्री 108 भावसागर महाराज ने कहा की प्रभु के गुणों में प्रीति होना भक्ति है, परिणामों का निर्मल होना ही भक्ति का मूल उद्देश्य है, भक्ति समस्त पापों को नष्ट करने वाली है।




यह परमात्मा से मिलाने एवम आत्मा से साक्षात्कार कराने में श्रेष्ठतम साधन है। प्रभु के गुणों की कथा पापो को नष्ट करने वाली है। प्रभु के नाम का स्मरण करने से समस्त पापों का नाश होता है। प्रभु का कीर्तन हृदय को पवित्र करता है।
आज के वर्तमान परिपेक्ष पर महाराज श्री ने कटाक्ष करते हुए कहा कि आज हम प्राचीन संस्कृति को छोड़ते हुए जा रहे हैं। पहले लोग चोटी रखते थे, पगड़ी, टोपी पहनते थे। तिलक लगाते थे। अब सभी यह छोड़ते चले जा रहे हैं। चोटी से बुद्धि बढ़ती है। स्तुति का अर्थ अति प्रशंसा माना जाता है। इसको आशिक गुणगान भी कहते हैं। इसका मूल उद्देश्य दुखों का नाश कर सुख को पाना है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
