श्री पुण्य सागर जी का 19 साधुओं सहित गुरु मंदिर भूमि पूजन शिलान्यास कार्यक्रम हेतु भव्य मंगल प्रवेश हुआ
भौरा आष्टा
परम पूज्य मुनि श्री पुण्य सागर जी का 6 मुनिराजो 12आर्यिका माताजी तथा 1 क्षुल्लक जी सहित भौरा आष्टा नगरी में भव्य मंगल प्रवेश 14 अप्रैल को हुआ ।प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री अजीत सागर जी महाराज के शिष्य मुनिश्री पुण्य सागर जी की दीक्षा उसी दिन हुई जब आचार्य श्री अजित सागर जी को आचार्य पद मिला । 15 अप्रैल को प्रातःभूमि शुद्धि, चित्र अनावरण दीप प्रवज्जलन कार्यक्रम हुए ।
विश्वास विनायका,कैलाश जैन संघस्थ विकास भैय्या अनुसार। 
आचार्य श्री शांति सागर जी की अक्षुण्ण बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री अजित सागर जी की जन्म भूमि भौरा आष्टा मध्यप्रदेश में उनके शिष्य परम पूज्य मुनि श्री पुण्य सागर जी एवम आर्यिका श्री सौरभ मति माताजी सहित 19 साधुओं के संघ सानिध्य में बाल ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी के सानिध्य में गुरु मंदिर का भूमिपूजन एवम शिलान्यास आज संपन्न हुआ।


प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री अजित सागर जी का जन्म मध्यप्रदेश भोरा आष्टा में श्रीमति रूपाबाई श्री जवर चंद जी के पुत्र श्री राजमल जी सन 1944 से आचार्य श्री वीर सागर जी के संघ में शामिल हुए आपकी मुनि दीक्षा सन 1961 सीकर में आचार्य श्री शिव सागर जी द्वारा हुई। आपको 7 जून 1987 को आचार्य पद दिया गया। 30 वर्ष के संयमी जीवन में आपने 10 मुनि,7 आर्यिका,एक ऐलक, 3 क्षुल्लक, तथा एक क्षुल्लिका दीक्षा दी । 
गौरव की बात है कि आचार्य श्री अजित सागर जी के दीक्षित 4 शिष्य वर्तमान में है जिनमे मुनि श्री पुण्य सागर जी मुनि
श्री चिन्मय सागर जी और आर्यिका श्री चैत्यमती मति आर्यिका श्री सौरभ मति जी हैं । आपकी समाधि वैशाख शुक्ला पूर्णिमा सन 1990 को साबला में हुई। राजेश पंचोलिया से प्राप्त जानकारीके साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312
